देवीपाटन मंडल में 1670 करोड़ के निर्माण कार्यों पर उठे सवाल, जांच शुरू
बलरामपुर। देवीपाटन मंडल में सड़क, पुल और सरकारी भवनों के निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतों के बाद शासन ने सख्ती दिखाते हुए जांच शुरू कर दी है। मंडलायुक्त शशि भूषण लाल सुशील ने मंडल के सभी जिलों में कराए गए निर्माण कार्यों का विस्तृत डाटा तैयार कराते हुए संयुक्त विकास आयुक्त को लोक निर्माण विभाग से पूरी रिपोर्ट जुटाने के निर्देश दिए हैं, ताकि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके। मंडल में कुल 1670 करोड़ 73 लाख 97 हजार रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्य कराए गए हैं, जिनमें गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।जानकारी के अनुसार मंडल में 64 नई सड़कों के निर्माण के लिए 76 करोड़ से अधिक का बजट स्वीकृत किया गया था, जबकि 27 सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं पर सबसे अधिक 860 करोड़ से ज्यादा खर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा 675 सड़कों की विशेष मरम्मत के लिए करीब 259 करोड़ और 1050 सड़कों की सामान्य मरम्मत के लिए 361 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ था। वहीं 987 सड़कों की पैच मरम्मत के लिए 22 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, लेकिन शिकायतें हैं कि यह कार्य केवल कागजों में ही सीमित रहा और जमीनी स्तर पर गुणवत्ता बेहद खराब है।
58 पुलों की जांच
सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि अन्य निर्माण कार्य भी जांच के घेरे में हैं। मंडल में 58 पुलों के निर्माण पर लगभग 89 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि 19 सरकारी भवनों के निर्माण के लिए करीब 1.62 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे। इन सभी कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं, जिसके चलते अब इनकी तकनीकी जांच कराने की तैयारी की जा रही है।जांच की आहट मिलते ही लोक निर्माण विभाग में खलबली मच गई है। कई जगहों पर अचानक सड़कों की मरम्मत शुरू करा दी गई है और रातोंरात काम पूरा करने की कोशिशें की जा रही हैं, ताकि संभावित खामियों को छिपाया जा सके। विभागीय स्तर पर यह हलचल इस बात का संकेत है कि शिकायतें गंभीर हैं और जांच में कई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
राज्य में लोक निर्माण खलबली
इसी बीच टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों पर शासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए गोंडा में तैनात अधिशासी अभियंता विनोद कुमार त्रिपाठी को हटाकर लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के निर्देश पर की गई मानी जा रही है और इसे टेंडर घोटाले की जांच में एक अहम कदम माना जा रहा है। लोक निर्माण विभाग के विशेष सचिव अमित आसेरी द्वारा जारी आदेश में उन्हें तत्काल प्रभाव से मुख्यालय में कार्यभार ग्रहण करने को कहा गया है।मंडल में लंबे समय से यह शिकायतें मिल रही थीं कि सड़क निर्माण से जुड़े टेंडरों में एक ही ठेकेदार समूह को लगातार काम दिया जा रहा है और तकनीकी शर्तों में बदलाव कर उसे लाभ पहुंचाया जा रहा है। एक चर्चित ठेकेदार की कई जिलों में गहरी पैठ होने की भी चर्चा है। अब जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही यह संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

