सद्भावना आवाज़
बलरामपुर।
आजकल के दौर में जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ यातायात के साधनों की भी उसी अनुसार आवश्यकता पड़ती है। यातायात के लिए वर्तमान समय में इलेक्ट्रॉनिक रिक्शा का उपयोग बढ़ गया है। नगर में डग्गा मार सवारी वाहनों की भरमार है। वर्तमान समय में यह भी देखा जा रहा है कि कमाने की लालच में पठन-पाठन को भूलकर नाबालिक बच्चे सड़कों पर सवारी गाड़ियों, ई-रिक्शा को फर्राटे से चला रहे हैं। खुद छोटी सी जगह पर बैठकर यह बच्चे अपने रिक्शे पर अधिक संख्या में सवारी बैठा लेते हैं जिससे राहगीरों को भी भारी खतरा रहता है। शासनादेश के अनुसार किसी भी वाहन चालक के पास वाहन के जरूरी कागजात के साथ-साथ उसका ड्राइविंग लाइसेंस होना भी आवश्यक होता है परंतु यहां पर तो नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अपात्र बच्चे अपनी और सवारियों की जान जोखिम में डालकर बेखौफ होकर सड़कों पर गाड़ियां और रिक्शा दौड़ा रहे हैं।
शरीर के सारे पुर्जों की वर्जिश

बता दें इन रिक्शों पर न केवल इंसान बल्कि भेड़ बकरी जानवर भी सवार होकर सफर का आनंद लेते हुए दिख जाते हैं। रिक्शों में सवारी थोक के भाव से भरे जाते हैं। इन वाहनों की सवारी रोमांच से भरी रोलर कोस्टर से कम नहीं होती है साथ ही शरीर के सारे पुर्जों की वर्जिश भी हो जाती है। इसके अलावा यात्री भी अपने गंतव्य तक समय पर पहुंचने के लिए बिना देखे बिना सोचे समझे अपनी जान को खतरे में डालकर इन्हीं नन्हे-मुन्ने बच्चों के रिक्शे पर बैठकर यात्रा भी कर रहे हैं। बलरामपुर के विभिन्न सड़कों के लिए इन वाहनों की रूट भी निर्धारित की गई है लेकिन इन वाहन चालकों को अचानक से देववाणी सुनाई पड़ जाती है और तुलसीपुर रोड पर जाने वाला रिक्शा बहराइच रोड पर मुड़ जाता है। जाम की एक वजह यह भी है। जब निर्धारित रूट में वाहन चालकों द्वारा स्वयं से ही बदलाव किया जाएगा तो एक ही रूट पर जाम को स्वाभिक ही है। ऐसा नहीं है कि इनमें सिर्फ खामियां ही हैं इन रिक्शों की कई विशेषताएं भी हैं जैसे इन्हे मालवाहक वाहन के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है और इनके माल ढोने की क्षमता की तो क्या ही बात इस मामले में तो ये पिकअप को भी पीछे छोड़ दें। दूसरी खासियत यह की आपको सफर के दौरान अकेलापन तो बिलकुल भी नहीं महसूस होगा, आपको अन्य 7 से 8 सवारियों के साथ का अनुभव प्राप्त होगा। तीसरी खासियत इनके छतों में भी अपार गजों का बल होता है जितना चाहें उतना भार डाल सकते हैं। अब ऐसे में दुर्घटना होना भी लाजमी है।
सुरक्षा की परवाह तनिक भी नहीं


