बलरामपुर (रेहराबाजार)। परंपरागत खेती से आगे सोचने का नतीजा क्या होता है, यह ग्रामसभा लौकिया ताहिर के युवा किसान नवनीत ने साबित कर दिखाया है। स्नातक तक पढ़ाई करने के बाद जहां ज्यादातर युवा नौकरी की तलाश करते हैं, वहीं नवनीत ने खेती को ही अपना भविष्य बनाया। नई तकनीक और उन्नत फसलों के सहारे उन्होंने एक एकड़ जमीन में ऐसी खेती की, जो अब मुनाफे की मिसाल बन चुकी है। नवनीत ने दो वर्ष पहले एक एकड़ भूमि में ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और गेंदे के फूलों की खेती शुरू की। उन्होंने ड्रैगन फ्रूट के 1400 पौधे, स्ट्रॉबेरी के 2400 पौधे और गेंदे के 16 हजार पौधे लगाए। सीमित जमीन में अधिक उत्पादन और बेहतर बाजार मिलने से उनकी आमदनी तेजी से बढ़ी।
कम समय में तैयार, लंबे समय तक देती है आमदनी
नवनीत ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की रेड डायमंड प्रजाति 14 से 18 माह में फल देने लगती है। वहीं स्ट्रॉबेरी का पौधा एक बार लगाने के बाद करीब 25 वर्षों तक लगातार फल देता है। इससे खेती में जोखिम कम होता है और आय स्थिर बनी रहती है।
खेती से रोजगार भी, गांव के चार परिवारों को सहारा
नवनीत की खेती केवल उनकी आमदनी तक सीमित नहीं है। उन्होंने गांव के जलेवा देवी, संगीता, मंगरू और नंदलाल को सालभर रोजगार दिया है। सभी मजदूरों को 350 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती है, जिससे उनके परिवारों की आजीविका भी सुरक्षित हुई है।
15 लाख की आय, 7 लाख खर्च के बाद 8 लाख बचत
युवा किसान के अनुसार ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और गेंदे की खेती से सालाना करीब 15 लाख रुपये की आय होती है। खेती में मजदूरी, पौधों की खरीद, दवाइयों और रखरखाव पर लगभग 7 लाख रुपये खर्च होते हैं। इस तरह उन्हें हर साल करीब 8 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा मिलता है।
कृषि विभाग भी मान रहा सफलता का मॉडल
एडीओ एजी रणधीर सिंह ने कहा कि बागवानी और फूलों की खेती कम लागत में अधिक लाभ देने वाला विकल्प है। नवनीत जैसे युवा किसान यह साबित कर रहे हैं कि यदि सही फसल और तकनीक अपनाई जाए, तो खेती भी सम्मानजनक आय का मजबूत जरिया बन सकती है।



