बलरामपुर। बलरामपुर जिले में मध्यान्ह भोजन योजना से जुड़े करीब 11 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बहुचर्चित घोटाले में कुल 44 लोगों को नामजद किया गया है, लेकिन सवा महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक केवल सात आरोपियों की ही गिरफ्तारी हो सकी है, जबकि अधिकांश आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
यह मामला 26 नवंबर को नगर कोतवाली में दर्ज किया गया था। एफआईआर में मध्यान्ह भोजन योजना से जुड़े अधिकारी, कई सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, मदरसा शिक्षा से जुड़े प्रधानाचार्य, प्रबंध समिति के पदाधिकारी और अन्य सहयोगी कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि योजनाबद्ध तरीके से फर्जी नामांकन, फर्जी उपस्थिति और कागजी खानापूर्ति के जरिए सरकारी धन का बड़े पैमाने पर गबन किया गया।
मामला दर्ज होने के अगले ही दिन पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जिला समन्वयक समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उस समय उम्मीद जताई जा रही थी कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा और बाकी आरोपियों को भी हिरासत में लिया जाएगा। लेकिन इसके बाद लगभग तीन सप्ताह तक पुलिस की कार्रवाई ठप नजर आई और कोई नई गिरफ्तारी नहीं हुई।
करीब 21 दिन बाद, 17 दिसंबर को पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिसके बाद कुल गिरफ्तारियों की संख्या सात हो गई। इसके बाद से अब तक इस प्रकरण में कोई नई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि इतने बड़े घोटाले के बावजूद आरोपी किस तरह खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस उन्हें पकड़ने में नाकाम क्यों साबित हो रही है।
प्रशासनिक स्तर पर जरूर कुछ कार्रवाई की गई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा पांच प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से मदरसा शिक्षा से जुड़े तीन प्रधानाचार्यों और कुछ कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई है। हालांकि, निलंबन की कार्रवाई कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है, क्योंकि निलंबित अधिकारियों में से बहुत कम ही अब तक जेल की सलाखों के पीछे पहुंच सके हैं।
जिला समन्वयक को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, लेकिन कई प्रधानाध्यापक, शिक्षक, प्रबंध समिति के पदाधिकारी और कर्मचारी अभी भी केवल फाइलों में ही आरोपी बने हुए हैं। सूत्रों की मानें तो कुछ आरोपी भूमिगत हो गए हैं, जबकि कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में खुलेआम घूम रहे हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि यह अनियमितता किसी एक-दो स्कूल तक सीमित नहीं थी। इसमें जिले के कई विकासखंडों के सरकारी स्कूल, मदरसे और उनसे जुड़ी समितियां शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। इस संभावना से शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
इस पूरे मामले में नगर कोतवाली प्रभारी का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस की अलग-अलग टीमें विभिन्न इलाकों में दबिश दे रही हैं और जल्द ही शेष आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि मुख्य आरोपी सहित सात लोगों को जेल भेजा जा चुका है।
फिलहाल, जिले में यह घोटाला चर्चा का विषय बना हुआ है। मध्यान्ह भोजन जैसी बच्चों से जुड़ी संवेदनशील योजना में हुए इतने बड़े गबन ने न सिर्फ प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि आम लोगों में भी नाराजगी पैदा कर दी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस और प्रशासन बाकी आरोपियों तक कब और कैसे पहुंच पाते हैं।



