लेखक :सुयश त्रिपाठी
सद्भावना आवाज़
बलरामपुर
देश बदल रहा है… ये स्लोगन काफी देखा और सुना लग रहा होगा? लेकिन क्या सच में देश बदल रहा है या देश के मेट्रोपोलिटन शहर ही बदल रहे हैं क्यूंकि बात करें छोटे शहरों कस्बों और गांवों की तो वहां की जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित नजर आ रही है। गर्मी अपने चरम पर है लेकिन शहर हो या फिर ग्रामीण इलाका इस समय बिजली की धुआंधार कटौती को लेकर हर तरफ हो हल्ला मचा हुआ है। इस भीषण तपिश में आम इंसान झुलस रहा है वही आम इंसान जो अच्छा उपभोगता बनकर समय से बिजली बिल भुगतान करता है और जो न किया तो खैर ऐसे बिजली की तार से उसके घर को जुदा किया जाता है कि मानों पाषाण युग का मानव हो। ऐसे तो बिजली आपूर्ति का शेड्यूल भी तय किया गया है, जिसमें शहर क्षेत्र में 24 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है। वहीं तहसील क्षेत्र में साढ़े 21 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति करने का शेड्यूल तय है, लेकिन लोगों को शेड्यूल के मुताबिक बिजली नहीं मिल पा रही है। हालत यह है कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में महज 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल रही है, जिससे लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
भगवतीगंज





