कानपुर ।
जे.के. कैंसर संस्थान में आने वाले 50 फीसद से अधिक लोग मुंह कैंसर से पीड़ित है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 की रिपोर्ट में खुलासा हुआ। इसमें किशोर व महिलाएं भी शामिल है। वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे 2023 किशोरावस्था से ही लोग गुटखा व तंबाकू का सेवन कर रहे है, जिसमें किशोरी और महिलाएं भी शामिल हैं। नतीजन कम उम्र से ही लोग मुंह के कैंसर से ग्रसित होने लग रहे है। जेके कैंसर में आने वाले 50 फीसद से अधिक लोग मुंह के कैंसर से पीड़ित है, जिस वजह से उनको कई तकलीफों का सामना भी करना पड़ रहा है। अधिकतर को पता तक चलता है, जब समस्या एडवांस स्टेज पर पहुंच जाती है।
शहर चमड़ा उद्योग के साथ ही गुटखा, पान और मसाला के लिए भी काफी मशहूर है। यहां के प्रमुख चौराहों, सड़कों और गलियों पर पान-मसाले की दुकानें व गुमटियां मिल जाएंगी, जहां पर लोग पान मसाला खाते और खरीदते नजर आएंगे। शौक के चक्कर में शुरू किया गया गुटखा लोगों की आदत में शुमार हो जाता है, जिसके बाद लोगों को कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ जाता है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे -5 की रिपोर्ट के मुताबिक कानपुर में 15 साल की उम्र से ही लोग गुटखा, पान, मसाला व तंबाकू का सेवन करने लग रहे है। जिससे युवास्था या उसके बाद लोगों को मुंह का कैंसर का दंश झेलना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 15 साल से अधिक उम्र तक 46.8 फीसदी पुरुष तंबाकू का सेवन कर रहे है। वही, 9.5 फीसदी किशोरी व महिलाएं भी तंबाकू का इस्तेमाल कर रही है।
मुंह साफ रखना जरूरी, नहीं तो हो सकती कई बीमारी
मौखिक स्वास्थ्य यदि ठीक नहीं है तो इससे कई सारी बीमारियां हो सकती है। दांतों में सड़न, कीड़े लगना जैसी समस्या मुंह में मौजूद एसिड के कारण होती है। इस वजह से दांतों के इनेमल खोखले होने लगते हैं और यही कारण है कि कैविटी का निर्माण होता है। इसके अलावा मुंह में मौजूद बैक्टीरिया दांतों को खराब करने लगते हैं। समय पर ध्यान न देने पर मुंह का कैंसर भी हो सकता है। वही, मुंह को स्वच्छ नहीं रखने पर दांतों व मसूड़ों से संबंधित कई संक्रमणों की आशंका भी बढ़ जाती है। जिन्जिवाइटिस, दांतों में सड़न, बैक्टीरियल संक्रमण, सांसों की बदबू जैसी परेशानियां तो होंगी ही, साथ ही इससे शरीर के दूसरे हिस्सों में भी समस्याएं हो सकती हैं।
मुंह के कैंसर के लक्षण के संकेत
1. मुंह का खुलना कम होना।
2. अचानक मिर्च -मसाला खाने में परेशानी होना।
3. मुंह में सफेद लकीरें बनना और जलन होना।
4. सूजन बनना और उसका लगातार बढ़ते रहना।
5. गले में सूजन व मुंह की चमड़ी कड़ी हो जाना।
6. बेवजह मुंह के किसी हिस्से से खून बहना।
संस्थान में 40 प्रतिशत मरीज मुंह के कैंसर से ग्रसित आते है। इनमें गुटखा, पान, मसाला व तंबाकू का सेवन करने की शिकायत अधिक रहती है। वही, कुछ मरीज तीसरे स्टेज पर दिखाने आते है, जिनकों बचा पाना मुश्किल हो जाता है।- डॉ. एसएन प्रसाद, निदेशक, जेके कैंसर संस्थान

