लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में शुक्रवार को हृदय रोगियों के इलाज का इंतजार अब जल्द खत्म होने वाला है। इसके लिए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने संस्थान में तीसरी कैथ लैब का उद्घाटन किया।
डिप्टी सीएम ने कहा कि यह नई कैथ लैब रोगियों को समय पर जांच और उपचार मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाएगी। अब इमरजेंसी हृदय रोगियों की जांच और उपचार भी तुरंत किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि संस्थान के कॉर्डियोलॉजी विभाग में अभी दो कैथ लैब हैं। तीसरी लैब शुरू होने के बाद प्रतिदिन एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर से जुड़े लगभग 30 उपचार किए जा सकेंगे, जो पहले लगभग 20 ही होते थे। इससे गंभीर हृदय रोगियों को शीघ्र, सुरक्षित और प्रभावी उपचार उपलब्ध होगा।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से सुधार हो रहा है और अस्पतालों को आधुनिक चिकित्सीय उपकरणों से अपग्रेड किया जा रहा है। लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने कम समय में काफी प्रगति की है। यहां रोबोटिक सर्जरी, किडनी ट्रांसप्लांट और न्यूरो साइंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रति दिन लगभग 250 से 300 मरीज कार्डियोलॉजी ओपीडी में परामर्श के लिए आते हैं। वार्षिक रूप से लगभग 50,000 ओपीडी परामर्श और करीब 8,000 मरीज भर्ती होते हैं। इसके साथ ही एक और नई कैथ लैब की खरीद प्रक्रिया प्रगति पर है, जिससे संस्थान में कुल चार कैथ लैब होंगी। इस वर्ष कार्डियोलॉजी विभाग को उन्नत तकनीक और उपकरणों से सुसज्जित किया जा रहा है, जिनमें उच्च स्तरीय एडवांस्ड इकोकार्डियोग्राफी मशीन, दो पोर्टेबल इको मशीनें, ट्रेडमिल टेस्ट (TMT) सुविधा और आईवस जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं।
कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह, सीएमएस डॉ. विक्रम सिंह, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरविंद सिंह, मातृ शिशु रेफरल हॉस्पिटल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. श्रीकेश सिंह, कॉर्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. भुवन चन्द्र तिवारी सहित अन्य डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद रहे।
कार्यक्रम के बाद डिप्टी सीएम ने मॉनिटरिंग रूम का निरीक्षण किया और रोगियों तथा उनके परिजनों से बातचीत कर उपचार संबंधी फीडबैक लिया। उन्होंने मरीजों से जानकारियां हासिल की और उपचार के दौरान आने वाली समस्याओं को नोट किया। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि नई कैथ लैब से न केवल रोगियों का इलाज तेज़ होगा, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर और भरोसा भी बढ़ेगा।



