अयोध्या ।
रामकथा के प्रसिद्ध कथावाचक प्रेममूर्ति प्रेमभूषण महाराज की प्रसिद्ध वैष्णव पीठ श्रीरामवल्लभाकुंज में 9 दिवसीय श्रीराम कथा का आरंभ हुआ। कथा का उद्घाटन आश्रम के प्रमुख और सरयू महाआरती के संरक्षक स्वामी राजकुमार दास ने किया। हजारों की संख्या में उपस्थित भक्त महाराज के गाए भजन पर झूमते नजर आए।
निवर्तमान मेयर ऋषिकेश उपाध्याय सहित कई संतों ने व्यासपीठ का पूजन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संत-जन और विशिष्ट जन उपस्थित रहे।

प्रेममूर्ति प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि एक स्वस्थ मनुष्य ही हर प्रकार के कार्यों को करने में सक्षम हो पाता है। इसके लिए उसके शरीर को स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक होता है।ठीक इसी प्रकार हमारी आत्मा को भी स्वस्थ रखने का एक सरल तरीका है। सत्संग का श्रवण और श्री राम कथा। श्री राम कथा आत्मा को भोजन प्रदान करती है।सुप्रसिद्ध कथावाचक प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि अगर जीवन में हमें आत्मिक सुख की प्राप्ति करनी है तो हमें श्री राम कथा का गायन, मनन और श्रवण जरूर करना चाहिए। यह आवश्यक नहीं है कि हम घंटों बैठकर से रामकथा सुने। अगर हम मन लगाकर 20 मिनट भी कथा सुनते हैं, तो यह हमें आत्मिक सुख की प्राप्ति कराती है।
उन्होंने कहा कि मानस जी सरल ग्रंथ नहीं है।
इनकी महिमा का बखान विभिन्न संतो ने बारंबार किया है। श्रीराम चरित मानस तुलसी दल के उस एक पत्ते के समान हैं। जिनके बिना भगवान की पूजा अधूरी रह जाती है। ठीक है इसी प्रकार से कोई भी विद्वान कोई भी ग्रंथ पढ़ ले। लेकिन अगर उसने मानस जी का पठन-पाठन नहीं किया तो उसकी यात्रा अधूरी रह जाती है।प्रेममूर्ति प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि ग्रंथ का तात्पर्य होता है कि वह साहित्य जो हमारे अंदर की ग्रंथियों को खोल दे। जब हम श्रेष्ठतम लक्ष्य के साथ ईमानदारी से प्रयास करते हैं तो ईश्वर भी हमारे कार्य को पूरा करने में सहयोगी बनते हैं। जीवन में कुछ भी पाना है तो हमें चलना तो अवश्य पड़ेगा।उन्होंने कहा कि पिछले कई जन्मों के पुण्य का संग्रह हमें सनातन धर्म में जन्म लेने के का अवसर प्रदान करता है। इसे व्यर्थ ही नहीं गंवाना चाहिए और भटकना भी नहीं चाहिए। राम चरित मानस में मनुष्य के जीवन जीने के लिए कई उपयुक्त और बहुत ही सटीक सिद्धांत निर्धारित किए गए हैं।

