बलरामपुर। सुहेलवा वन क्षेत्र में हाल के दिनों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) गौरव गर्ग ने बताया कि पिछले डेढ़ महीने के भीतर जंगल क्षेत्र में कुल 5 लोगों की जान गई है। इनमें से दो घटनाएं 25 दिसंबर को हुईं, जब स्थानीय लोग जंगल में हिंसक वन्यजीवों के हमले का शिकार बने।
डीएफओ गौरव गर्ग ने बताया कि ठंड के मौसम में तेंदुआ, बाघ, भेड़िया और सियार जैसी हिंसक जानवरों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। भोजन और पानी की तलाश में ये जानवर अक्सर मानव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर चले आते हैं, जिससे संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है। प्रारंभिक जांच से यह भी पता चला है कि हाल की घटनाएं उन समय हुईं जब लोग बिना किसी सुरक्षा उपाय या पूर्व सूचना के जंगल में प्रवेश कर गए थे।
वन विभाग ने स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही जंगल में जाएं। यदि जंगल में जाना जरूरी हो, तो पहले वन विभाग के स्थानीय स्टाफ या रेंज अधिकारी से संपर्क करें और उनकी निगरानी में ही प्रवेश करें। किसी भी हिंसक जानवर की मौजूदगी की सूचना तुरंत वन विभाग या पुलिस को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
डीएफओ गौरव गर्ग ने कहा कि सभी रेंज अधिकारियों और फील्ड स्टाफ को अलर्ट पर रखा गया है। जंगल में गश्त बढ़ा दी गई है और संवेदनशील इलाकों पर विशेष निगरानी की जा रही है। वन विभाग और जिला प्रशासन मिलकर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने निवासियों से कहा, “आपकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। यदि आप सतर्क रहेंगे और नियमों का पालन करेंगे, तो हम भी पूरी मजबूती से आपकी सुरक्षा कर पाएंगे।”



