लखनऊ। राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले में जांच की आवश्यकता मानते हुए एफआईआर दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब संबंधित पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना की जाएगी। इस फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है।
इन-चैंबर सुनवाई के बाद कोर्ट का फैसला
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ में 16 अप्रैल को इन-चैंबर सुनवाई हुई, जिसमें सभी पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे।
सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने मामले में आदेश सुरक्षित रखा था, जिसे अब जारी कर दिया गया है।
याचिका को मंजूरी, FIR दर्ज करने के आदेश
याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर की याचिका को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया जांच की जरूरत है।
इसी के तहत कोर्ट ने संबंधित थाने को एफआईआर दर्ज कर विधिक प्रक्रिया के तहत जांच करने के निर्देश दिए हैं।यह याचिका संख्या 673/2026 है, जिसमें 28 जनवरी 2026 को स्पेशल एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कोतवाली, रायबरेली को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार किया गया था।
गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की मांग
याचिका में राहुल गांधी के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी, जिनमें शामिल हैं
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आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923
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पासपोर्ट अधिनियम, 1967
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विदेशी अधिनियम, 1946
वकील ने कहा
यूपी गवर्नमेंट की तरफ से वकील ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की जांच CBI करें। इस पर जज ने मंजूरी करते हुए कहा कि FIR दर्ज करके मामले को सीबीआई को ट्रांसफर कर जज करें।…वहीं जांच करेगी जिस पर जज ने सहमति भी जताई है अब पूरे मामले पर एफआईआर दर्ज कर प्रकरण की जांच सीबीआई करेगी।

