बलरामपुर। बहुचर्चित छांगुर बाबा प्रकरण में अहम मोड़ आ गया है। स्पेशल एटीएस कोर्ट लखनऊ ने मुख्य आरोपी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद अब मामले में नियमित ट्रायल का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। फैसले के बाद अब सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिक गई हैं, जहां साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आगे की प्रक्रिया चलेगी।यह मामला अवैध धर्मांतरण, विदेशी फंडिंग, राष्ट्रविरोधी गतिविधियों, संगठित नेटवर्क और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा हुआ है। अदालत में अब अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष अपने-अपने तर्क, दस्तावेज और गवाह पेश करेंगे। कानूनी जानकारों के अनुसार, यह चरण पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण दौर माना जाता है।सूत्रों के मुताबिक, विशेष अदालत में करीब छह घंटे तक चली विस्तृत बहस के बाद कोर्ट ने आदेश सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और उपलब्ध साक्ष्य मुकदमे की सुनवाई के लिए पर्याप्त हैं। इसी आधार पर डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी गई।यूपी एटीएस ने गिरफ्तारी के बाद लगातार छापेमारी, पूछताछ और डिजिटल विश्लेषण के जरिए कथित नेटवर्क की परतें खोलने का दावा किया है। जांच एजेंसियों ने बैंक खातों, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल, विदेश यात्राओं और कई दस्तावेजों की गहन जांच की है। कुछ संदिग्ध विदेशी संपर्क भी एजेंसियों की जांच के दायरे में बताए गए हैं।
1400 पन्नों की चार्जशीट में बड़े खुलासे
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और यूपी एटीएस की ओर से करीब 1400 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई है। इसमें बैंक खातों का विवरण, विदेशी फंडिंग के स्रोत, संपत्तियों की खरीद-फरोख्त, आरोपियों के आपसी संबंध और कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली का विस्तृत ब्योरा शामिल है।जांच एजेंसियों का दावा है कि वर्ष 2015 से 2024 के बीच 100 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ। यह धनराशि सऊदी अरब, दुबई समेत खाड़ी देशों से विभिन्न माध्यमों से भारत भेजी गई। मनी ट्रेल की जांच में कई संदिग्ध लेनदेन सामने आने की बात कही गई है।जांच में यह भी सामने आया है कि कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों ने बलरामपुर समेत कई जिलों में जमीन और संपत्तियां खरीदीं। कुछ संपत्तियां परिजनों और सहयोगियों के नाम पर ली गईं। पुणे में भी करीब 16 करोड़ रुपये की जमीन खरीद का मामला सामने आया है।एजेंसियों का कहना है कि इन संपत्तियों का उपयोग गतिविधियों के संचालन केंद्र के रूप में किए जाने की आशंका है। प्रशासन पहले ही कुछ अवैध निर्माणों पर कार्रवाई कर चुका है, जिससे मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।
सुनवाई में सामने आएंगे कई नए तथ्य
एजेंसियों के अनुसार, नेटवर्क के जरिए फर्जी पहचान और नाम बदलकर लोगों से संपर्क किया जाता था। इसके बाद उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित कर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता था। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि अलग-अलग लोगों की भूमिकाएं तय थीं और पूरा तंत्र संगठित तरीके से संचालित हो रहा था।अब नियमित ट्रायल शुरू होने के बाद गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और जिरह की प्रक्रिया में कई नए तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है। अदालत की आगामी सुनवाई पर अब प्रदेशभर की नजरें टिकी हुई हैं।

