बलरामपुर। माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 15 मार्च 2024 को स्थापित इस विश्वविद्यालय ने कम समय में ही यूजीसी और एआईएसएचई जैसी मान्यता प्राप्त कर ली है, जिससे इसकी शैक्षणिक गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय का नाम नेचर इंडेक्स में भी दर्ज हुआ है, जो इसके शोध कार्यों की बढ़ती गुणवत्ता को दर्शाता है।शैक्षणिक सत्र 2025-26 में विश्वविद्यालय परिसर में संचालित छह परास्नातक पाठ्यक्रमों में 70 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है, जबकि पीएचडी कार्यक्रम में 150 शोधार्थी पंजीकृत हैं।
स्नातक व परास्नातक प्रवेश प्रक्रिया शुरू
विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों में अब तक लगभग 70 हजार विद्यार्थियों का प्रवेश हो चुका है। प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं सफलतापूर्वक और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई गईं, जिनके परिणाम भी जारी किए जा चुके हैं। अब द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाओं की तैयारी तेज कर दी गई है, जो 29 मई 2026 से प्रस्तावित हैं।इसी क्रम में सत्र 2026-27 के लिए स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इनमें बीए, बीएससी, बीकॉम, बीएससी (कृषि) जैसे स्नातक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ एमए, एमएससी, एमकॉम, एमएसडब्ल्यू, एलएलएम और एमएससी (कृषि) जैसे परास्नातक पाठ्यक्रम शामिल हैं।
स्नातक व परास्नातक प्रवेश प्रक्रिया शुरू
विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों को आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा देने पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसके तहत डेटा साइंस, बायोटेक्नोलॉजी, योगिक साइंस, क्वांटम साइंस और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे नए और उभरते हुए विषयों की पढ़ाई भी कराई जा रही है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर करियर अवसर मिल सकें।इसके साथ ही 15 मई 2026 से समर्थ पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह ने छात्र-छात्राओं और अभिभावकों से अधिक से अधिक संख्या में पंजीकरण कराने और विश्वविद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था का लाभ उठाने की अपील की है।

