सीतापुर। आनंदी देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सीतापुर में रविवार को विद्या भारती अवध प्रांत के नवचयनित आचार्यों का 15 दिवसीय प्रांतीय आचार्य प्रशिक्षण वर्ग शुरू हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन विद्या भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर ने मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। प्रशिक्षण वर्ग में अवध प्रांत के 13 जिलों से आए नवचयनित शिक्षक भाग ले रहे हैं।उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. राम मनोहर ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि ज्ञान का मंदिर है। उन्होंने कहा कि आचार्य उस मंदिर के पुजारी हैं और विद्यार्थी ईश्वर के अंश हैं।
नवचयनित आचार्य ले रहे प्रशिक्षण
उन्होंने बच्चों को कोरा कागज बताते हुए कहा कि उनके अंदर संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण की जिम्मेदारी आचार्य की होती है।उन्होंने कहा कि ईमानदारी केवल पैसों तक सीमित नहीं होती, बल्कि समय पालन और अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करना भी ईमानदारी है। उन्होंने आचार्य जीवन के तीन सूत्र बताते हुए कहा कि समझदारी से ईमानदारी, ईमानदारी से जिम्मेदारी और जिम्मेदारी से भागीदारी विकसित होती है।भारतीय शिक्षा समिति उत्तर प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक रामजी सिंह ने कहा कि आज का शिक्षक केवल टीचर नहीं, बल्कि भारतीय गुरु परंपरा का वाहक है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण वर्ग नए आचार्यों को शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं।

जीवन मूल्यों से जोड़ने पर दिया गया बल
वक्ताओं ने बताया कि सरस्वती शिशु मंदिर की शुरुआत वर्ष 1952 में एक झोपड़ी से हुई थी और आज यह अभियान देशभर में विस्तारित हो चुका है। उन्होंने कहा कि आचार्य केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाता, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है।कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा समिति अध्यक्ष हरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, डॉ. किरनलता डंगवाल, प्रांतीय शैक्षिक प्रमुख सुरेश सिंह, सीतापुर संभाग निरीक्षक अवरीश, साकेत संभाग निरीक्षक गोपाल राम मिश्र, विद्यालय अध्यक्ष सुभाष चंद्र अग्निहोत्री, प्रबंधक राम रस्तोगी, प्रधानाचार्य राम निवास सिंह सहित कई गणमान्य मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ आचार्य राजेश पाण्डेय ने किया, जबकि आभार ज्ञापन सुभाष चंद्र अग्निहोत्री ने किया।

