बलरामपुर। जिला महिला अस्पताल में हाईटेक उपकरणों की खरीद में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। शासन से मिले 1.52 करोड़ रुपये के बजट के खर्च और निविदा प्रक्रिया को लेकर गठित जांच समिति ने अस्पताल प्रशासन से सभी संबंधित अभिलेख तलब किए हैं। मामले में खरीद प्रक्रिया, उपकरणों की गुणवत्ता और बजट उपयोग को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।जानकारी के मुताबिक, जिला महिला अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए शासन स्तर से जनवरी 2026 में 1.52 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था। इस राशि से अस्पताल में नए चिकित्सा उपकरण और सुविधाएं विकसित की जानी थीं। आरोप है कि तत्कालीन सीएमएस डॉ. सुमन दत्त गौतम ने सेवानिवृत्ति से पहले जल्दबाजी में खरीद प्रक्रिया पूरी कराई और इसमें नियमों की अनदेखी की गई।
पुराने उपकरण कंडम किए बिना खरीदे गए नए सामान
सूत्रों के अनुसार, अस्पताल में पहले से मौजूद कई उपकरणों को कंडम घोषित किए बिना ही नए उपकरणों की खरीद कर ली गई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि पुराने संसाधनों के रहते इतनी बड़ी खरीदारी की आवश्यकता क्यों पड़ी। वहीं निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता न बरतने और खरीद में मनमानी किए जाने की भी शिकायतें सामने आई हैं।बताया जा रहा है कि उपकरणों की खरीद में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कई मामलों में फर्म चयन और रेट निर्धारण को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है। यही वजह है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।मामले की जांच के लिए सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति में एसीएमओ स्टोर डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव और वित्त एवं लेखाधिकारी सत्यनारायण को शामिल किया गया है। जांच टीम अस्पताल में हुए बजट खर्च, निविदा प्रक्रिया और उपकरण खरीद से जुड़े सभी दस्तावेजों की पड़ताल करेगी।
अपर निदेशक को भेजी जाएगी रिपोर्ट
जांच समिति में शामिल एसीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बजट खर्च और खरीद प्रक्रिया से संबंधित अभिलेख मांगे गए हैं। सभी दस्तावेजों की जांच के बाद रिपोर्ट तैयार कर अपर निदेशक को भेजी जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप
महिला अस्पताल में करोड़ों रुपये की खरीद जांच के दायरे में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच पूरे मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि इसमें किन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होती है।

