लखनऊ। राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित नरही इलाके में लगभग 90 वर्ष पुराने विद्या मंदिर गर्ल्स हाईस्कूल पर ताला लगने के बाद सैकड़ों छात्र-छात्राओं का भविष्य संकट में पड़ गया है। शनिवार को विद्यालय के बाहर बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों ने प्रदर्शन कर स्कूल को बचाने की मांग उठाई। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भावुक अपील करते हुए कहा कि उनकी पढ़ाई और भविष्य को बचाया जाए।विद्यालय प्रबंधन का आरोप है कि भूमि विवाद के चलते स्कूल को अचानक बंद करा दिया गया। 4 जून को पुलिस की मौजूदगी में स्कूल भवन पर ताला लगा दिया गया, जबकि प्रबंधन को कोई पूर्व नोटिस नहीं दिया गया। इस कार्रवाई के बाद स्कूल में पढ़ने वाले करीब 250 छात्र-छात्राएं और 10 शिक्षक असमंजस की स्थिति में हैं।विद्यालय की प्रबंधक संतोष रस्तोगी के अनुसार, स्कूल की स्थापना वर्ष 1936 में हुई थी। यह भूमि शिक्षा के उद्देश्य से दान में दी गई थी। उनका आरोप है कि भूमिदाता की मृत्यु के बाद कुछ लोगों ने कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति पर दावा किया और उसी के आधार पर एडीएम कोर्ट से विद्यालय बंद कराने का आदेश हासिल कर लिया।प्रबंधन का कहना है कि उन्हें न तो आदेश की जानकारी दी गई और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला। अचानक हुई कार्रवाई से दशकों पुरानी शैक्षणिक संस्था का संचालन ठप हो गया है।
बारिश में भीग गए बच्चों के रिकॉर्ड
कार्यवाहक प्रधानाचार्य रश्मि ने आरोप लगाया कि स्कूल में ताला लगाने के दौरान कर्मचारियों और शिक्षकों को जबरन बाहर कर दिया गया। विद्यालय के महत्वपूर्ण दस्तावेज, छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड और पुराने अभिलेखों को बोरे में भरकर रख दिया गया। इसके बाद हुई बारिश में कई दस्तावेज भीग गए और नुकसान हुआ।उन्होंने बताया कि विद्यालय की अलमारियां भी गिरा दी गईं, जिससे वर्षों पुराने अभिलेखों को क्षति पहुंची। प्रधानाचार्य के अनुसार, ये दस्तावेज बच्चों के शैक्षणिक भविष्य से जुड़े हुए थे और उनका सुरक्षित रहना बेहद जरूरी था।
‘बेटी पढ़ाओ’ के बीच बेटियों के स्कूल पर ताला
प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा भी विद्यालय पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ भूमाफियाओं और असामाजिक तत्वों ने मिलकर स्कूल पर कब्जा करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि जिस स्कूल में इलाके की बेटियां शिक्षा ग्रहण कर रही हैं, उसी को बंद कर दिया गया है।विधायक ने कहा कि सरकार एक ओर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर बच्चियों की शिक्षा पर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर विद्यालय को पुनः संचालित कराने की मांग की।
शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि पूरे मामले की जानकारी जिला विद्यालय निरीक्षक और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन विद्यालय के हितों की रक्षा के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। इससे स्कूल से जुड़े लोगों में नाराजगी और असुरक्षा की भावना बढ़ी है।दसवीं कक्षा के छात्र कृष्ण ने कहा कि उनका हाईस्कूल पंजीकरण इसी विद्यालय से हुआ है। यदि स्कूल बंद रहा तो बोर्ड परीक्षा देने में भी परेशानी आ सकती है। उन्होंने कहा कि स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि उनके सपनों और दोस्तों से जुड़ी यादों का केंद्र है।वहीं सातवीं कक्षा के छात्र राधा रमन ने कहा कि वह बचपन से इसी विद्यालय में पढ़ रहे हैं और आगे चलकर सेना में भर्ती होना चाहते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से हाथ जोड़कर अपील की कि स्कूल को बंद न होने दिया जाए ताकि उनकी पढ़ाई जारी रह सके।

