लखनऊ।
लखनऊ की संगीत नाट्य एकेडमी में शुक्रवार को लोगों ने बुन्देली गीत का मजा लिया। मौका था इंडियन काउन्सिल फॉर कल्चरल रीलेशन और यूपी संगीत नाटक एकेडमी के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित होरिजन सीरीज के कार्यक्रम का। इस दौरान बुन्देली लोक गायन का आयोजन हुआ।
जिसमें बांदा की मशहूर गायक, अर्चना कोटार्य एक से बढ़कर एक बुन्देली गीत की परफॉरमेंस दी। इस दौरान आईआईसीआर की तरफ से कई विदेशी मेहमानों ने भी कार्यक्रम का मजा लिया।अर्चना ने 15 वर्ष की छोटी उम्र से ही गाने का अभ्यास शुरू कर दिया ।जिसमें उनके मामा और मां ने उनकी पूरी मदद की। देश के कई मंचों पर अपनी आवाज का जादू बिखेर चुकी अर्चना ने लखनऊ में भी कई बुन्देली गीत प्रस्तुत किये। इस दौरान उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में शादी या और कोई खुशी का मौका इन गानों के बिना अधूरा है। ‘बड़ो नीको बने श्रंगार’ गीत से कार्यक्रम शुरू हुआ। इसके बाद ‘बिन पग धोए’ और ‘सिर बांधे मुकुट’ गीत पर भी खूब तालियां बजीं।फिर ‘फागुन के महिना रसीले, गहरे नईया छैला छबीले’ गीत ने भी सबकी तारीफ बटोरीं। पूरे कार्यक्रम में लगभग 8 बुन्देली गीतों का लोगों ने आनंद लिया। इस दौरान सिन्थेसाईजर पर सोनू, तबला पर विक्की, ढोलक पर रवि और ऑक्टोपैड पर सूरज ने गायक अर्चना का साथ दिया। सभी कलाकारों का तालमेल वाकई तारीफ के काबिल रहा।


