लखनऊ।
यूपी में 23 साल बाद बिजली कर्मचारी और इंजीनियर रात 12 बजे के बाद से हड़ताल पर है। लखनऊ में गुरुवार को राणा प्रताप मार्ग स्थित फील्ड हॉस्टल पर 1500 से ज्यादा इंजीनियर और कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे है। संगठन के नेता सभा को संबोधित कर रहे हैं। लेखा संगठन आंदोलन में शामिल नहीं है। लेकिन ज्यादातर काम कर्मचारियों से संबंधित होते हैं। ऐसे में यहां भी कोई काम नहीं हो रहा है। हालांकि इनके हड़ताल के बाद मंत्री एके शर्मा ने भी सख्त रूप अपनाया है।मिली जानकारी के अनुसार, राजधानी में बिजली कटौती पर फॉल्ट का काम सुचारु रूप से चल रहा है। बाकी काम जैसे कि उपभोक्ता अपना बिल सुधार काम प्रभावित हो रहा हैं। क्योंकि जेई , एसडीओ और एक्सईएन के अकाउंट से ही यह काम होते हैं। इसमें करीब 90 फीसदी लोग हड़ताल में शामिल हैं।
राजभवन डिवीजन के अधिशासी अभियंता का कमरा खाली है। वहां कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मौजूद नहीं है।प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनके समर्थन में पूरे देश के 27 लाख बिजली कर्मचारियों अपने – अपने प्रदेश में मार्च निकालने का फैसला किया है। देश के सभी बड़े बिजली नेता समर्थन में लखनऊ भी आ रहे हैं।मंत्री एके शर्मा ने कहा है कि आंदोलन के चलते अगर बिजली व्यवस्था में परेशानी आती है तो प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती से निपटा जाएगा। उन्होंने इस मामले में दलित इंजीनियरों के संगठन पॉवर ऑफिसर्स एसोसिएशन को अपने साथ कर लिया है। संगठन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने मंत्री को आश्वासन दिया है कि उनके साथ के लोग दो घंटा अतिरिक्त काम करेंगे। जरूरत पड़ी तो वह 24 घंटे काम करेंगे। लेकिन बिजली व्यवस्था बिगड़ने नहीं होने देंगे।नए कनेक्शन और लोड के काम होंगे प्रभावित
प्रदेश के विभिन्न जिलों में अप्रैल से पहले उपकेंद्रों के मरम्मत का काम चल रहा है। हड़ताल की वजह से वह काम प्रभावित होगा। इसके अलावा नए कनेक्शन मिलने वाले काम भी नहीं होंगे। अगर कोई उपभोक्ता अपना बिल सही कराने के लिए उपकेंद्र जाता है तो उसको भी परेशानी झेलनी पड़ेगी। साथ ही अगर कहीं फॉल्ट आता है तो बिजली कर्मचारी उसको बनाने से इंकार भी कर सकता है। ऐसे में आम आदमी के लिए अगले 72 घंटे परेशानी वाले होगी।चेयरमैन एम देवराज से सीधी लड़ाई कोई भी नेता चेयरमैन को हटाने की सीधी मांग नहीं कर रहा है। लेकिन लिखित समझौते का आश्वासन देकर यह बताया जा रहा है कि चेयरमैन के चुनाव की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। ऐसे में उस प्रक्रिया के तहत चुनाव होना चाहिए। अब ऐसे में वह प्रक्रिया अपनाई जाती है तो पहले मौजूदा चेयरमैन एम देवराज को हटाना पड़ेगा। सूत्रों का कहना है कि अगर केवल यह मांग पूरी होती है तो आंदोलन वापस ले लिया जाएगा। हालांकि सरकार इस मांग को पूरी करने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में अभी टकराव बढ़ गया है।
बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने हड़ताल पर जाने से पहले इस मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप करने की मांग की है। समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि ऊर्जा मंत्री ने लिखित समझौता करने के बाद अब हमारी मांगों को मानने से इंकार कर दिया है। ऐसे में हड़ताल पर जाना हमारी मजबूरी है।मांगों पर कोई कार्रवाई न होने से नाराज इंजीनियरों ने 72 घंटे के हड़ताल का ऐलान किया है। जिससे 3 करोड़ बिजली उपभोक्ता की परेशानी बढ़ सकती है।

