सद्भावना आवाज़
अंकिता त्रिपाठी
बलरामपुर।
बलरामपुर जिले के सदर विधायक ने ऊर्जा मंत्री वा उत्तर प्रदेश शासन के जल शक्ति विभाग उत्तर प्रदेश को पत्र लिखा है। पत्र में विधायक ने लिखा है कि उनके द्वारा बलरामपुर के तटवर्ती इलाके में भ्रमण किया गया, स्थानीय लोगों से बातचीत किया गया स्थानीय लोगों ने विधायक से बताया राप्ती नदी के कटान से ग्रामीणों की कृषि योग्य भूमि जलमग्न होती जा रही है। इसके बाद भी बलरामपुर प्रशासन द्वारा बाद मरम्मत कार्य व किसानों की जमीन की कटान रोकने के कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं। इस पर विधायक सदर ने प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं।

एक बहुत पुरानी कहावत है की “जिसकी लाठी उसकी भैंस”
और यह सच भी होते देखा गया है, क्या सामाजिक रूप से क्या राजनीतिक रूप से। किंतु जनपद बलरामपुर में एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है जिसने शायद इस मुहावरे को भी गलत साबित कर दिया है। पता चला है की बलरामपुर सदर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक पलटू राम ने प्रमुख सचिव जलशक्ति विभाग को एक पत्र लिखा है, जिसमे उन्होंने बलरामपुर के अधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाया है।
विधायक सदर ने बलरामपुर प्रशासन पर बाढ़ से निपटने और कटान को रोकने के कार्य में ढिलाई बरतने का लगाया गंभीर आरोप।
- 6 वर्ष से सत्ता पक्ष के विधायक फिर भी विभाग और अधिकारियों ने क्यों न सुनी।
- बाढ़ से बचाव के लिए समय रहते क्यों नहीं किया पहल?
- जिम्मेदार पद पर होते हुए भी क्या खाली पत्र लिखने से दूर होगी अव्यवस्था?
- किसी भी प्रकार की अप्रत्याशित घटना की जिम्मेदारी लेगा कौन?
- विद्युत व्यवस्था जर्जर क्या पत्राचार से निकलेगा हल?
विधायक सदर ने यह कहा है, की राप्ती नदी का जलस्तर निरंतर बढ़ रहा है, तथा आस पास के क्षेत्रों में कटान भीषड़ पैमाने पर जारी है। फिर भी विभाग और अधिकारी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।
इन इलाकों में बाढ़ का खतरा। विधायक ने बलरामपुर प्रशासन पर कार्य ना कराने व धन गबन करने का आरोप भी लगाया।
विधायक ने यह भी कहा की उनके द्वारा छीत्तर सिंह डिहवा, करमहाना, खमहरिया घाट, पिपरा घाट पुल आदि जगहों का पूर्व में निरीक्षण भी किया गया तथा व्याप्त स्थिति से लगातार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया फिर भी अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पत्र के माध्यम से विधायक ने अधिकारियों पर बाढ़ के नाम पर धन के गबन का भी आरोप लगाया है। विधायक का कहना है की प्रतिवर्ष विभाग इसी तरह जलस्तर बढ़ने का इंतजार करता है तथा बाद में सारा बजट डकार जाता है। विभाग कभी कटान को रोकने और बाढ़ से बचने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं करता जिससे हर वर्ष बलरामपुर की आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। विधायक ने यह भी बताया की निरंतर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अधिकारियों को वह सचेत करते रहे हैं फिर भी इपसर कोई कार्यवाही नही होती है। प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर विधायक पलटुराम ने कटान को रोकने के लिए अविलंब उपाय किए जाने तथा अभी तक कटान को रोकने के लिए कितनी धनराशि को खर्च किया गया इसकी जांच करने की मांग की हैं।
जब विधायक की नहीं सुनी प्रशासन ने फरियाद तो आम जनता का क्या होगा हाल
अब बताइए सत्ता पक्ष के विधायक का ये हाल है, तो बलरामपुर की जनता का तो ऊपरवाला ही मालिक है। जब विधायक बार बार पत्र लिखकर ऐसे गंभीर मुद्दों को उठा रहा और फिर भी विभाग मौन है, फिर आम नागरिक तो अपनी चप्पल भी घिस डालेंगे फिर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला। ऐसे में सोचना यह जरूरी है की आने वाले समय में यदि कोई अप्रत्याशित घटना होती है, कोई आपदा आती है तो जिम्मेदार कौन होगा।
6 साल से विधायक बलरामपुर सदर ने सीट पर जमाया हैं कब्जा। विद्युत विभाग कि कमी आज ही क्यों दिखी
विधायक पलटूराम ने ऊर्जमंत्री के नाम भी एक पत्र लिखा, जिसमे उन्होंने लिखा की नगर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की विद्युत व्यवस्था काफी खस्ताहाल स्थिति में है। कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां बिजली सप्लाई नाममात्र है, और इसकी वजह से नागरिकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विधायक ने लिखा है की उतरौला, हरिहरगंज, गौरा समेत करीब 1 दर्जन फीडर ऐसे हैं जहां पर विद्युत सप्लाई सुचारू रूप से नही हो पा रही है। जिससे जनता में काफी आक्रोश भी है।


