सद्भावना आवाज़
गोंडा
संचारी रोगों की प्रभावी रोकथाम के दावे के बावजूद डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को 12 नए मरीज मिलने के साथ डेंगू संक्रमितों का आंकड़ा 138 पहुंच गया। बाबू ईश्वर शरण चिकित्सालय के दोनों मेडिकल वार्ड में तेज बुखार से पीड़ित 17 मरीज भर्ती हैं। जिनका सैंपल लेकर एलाइजा जांच के लिए भेजा गया है। वहीं, डेंगू डेडीकेटेड वार्ड में छह डेंगू संक्रमितों का उपचार चल रहा है।संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत शहर से लेकर गांवों तक चल रहा संचारी रोग नियंत्रण अभियान बेअसर साबित हो रहा है। एक अक्तूबर को जहां डेंगू मरीजों की संख्या जहां 70 थी, वहीं दस ही दिन में करीब दो गुना केस सामने आ गए। जिम्मेदार अधिकारी मच्छरजनित रोगों से निजात के लिए जनसहयोग न मिल पाने की दुहाई दे रहे हैं।संक्रमित मरीज मिलने के बाद गांवों में स्वास्थ्य टीम की निरोधात्मक कार्रवाई सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित है। यहां तक सीएमओ दफ्तर के बाहर महीनों से भरे गंदे पानी में न तो छिड़काव किया गया और न ही उसे हटाने की कोई व्यवस्था की गई।
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काबू पाने के लिए जन सहयोग भी जरूरी
संक्रामक रोग कंट्रोल रूम प्रभारी डॉ. वीके गुप्ता का दावा है कि क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) को सक्रिय कर दिया गया है।मेडिकल कॉलेज परिसर में बने क्षेत्रीय निदान केंद्र में बुखार के मरीजों की लंबी कतारें लग रहीं हैं। संदिग्ध लक्षण के चलते डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, वायरल इंफेक्शन संबंधी जांच कराने वाले मरीजों का तांता लगा है। इसी प्रकार निजी पैथाेलॉजी में भी जांच के लिए मरीजों की भीड़ लगी रहती है।सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा का कहना है कि बदलते मौसम की वजह से मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ा है। इसमें डेंगू के मच्छरों का डंक ज्यादा खतरनाक हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग अन्य विभागों के सहयोग से रोकथाम की कार्रवाई कर रहा है मगर मच्छरों पर काबू पाने के लिए जन सहयोग भी जरूरी है। घर के पास नालियों में पानी का ठहराव न होने दें। कूलर, फ्रीज व पशुओं के बर्तन में पानी जमा न होने दें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
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