सद्भावना आवाज़
उत्तरप्रदेश।
भारत के महान क्रांतिकारी नेताजी की उपाधि प्राप्त करने वाले सुभाष चंद्र बोस को सम्मान और उनके पराक्रम को सराहने के लिए हर साल 23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है। और आज सुभाष चंद्र बोस की 127वीं जयंती के मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ के परिवर्तन चौक पर स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।वही इस अवसर पर सीएम योगी ने कहा की भारत माता के महान सपूत भारत की आजादी के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस कि आज पावन जयंती है इस अवसर पर प्रदेश सरकार की ओर से और प्रदेश की 25 करोड़ जनता की ओर से नेताजी सुभाष चंद्र बोस को देश के लिए उसकी सेवाओं के लिए युवाओं में ऊर्जा भरने के लिए नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
आजाद हिंद फौज का किया गठन
हम सब जानते हैं कि भारत की आजादी के आंदोलन के दौरान भारत के युवाओं को विदेशी हुकूमत के खिलाफ एकजुट करके लड़ने की एक नई प्रेरणा नेताजी ने दी थी। न केवल भारत में बल्कि भारत के बाहर भी कैसे हमें देश की आजादी की लड़ाई को आगे ले जाना है एक गजब की रणनीति नेताजी ने उसे समय तैयार की थी आज उसी का परिणाम है कि हम जब भारत के बाहर जाते हैं बहुत सारी जगह पर तो हमें नेताजी से जुड़े हुए वह स्थल देखने को मिलते हैं।उसे समय युवाओं का उमंग करते थे नेताजी ने जो आवाहन किया था जब देश की आजादी की लड़ाई को प्रखरता के साथ उन्होंने आगे बढ़ने का कार्य किया और आजाद हिंद फौज का गठन किया। तो उन्होंने भारत के नौजवानों को एक ही आभा किया कि तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा यह देश की आजादी का एक मंत्र बन गया और देश की आजादी का मंत्र बनाकर के लाखों लाख युवा देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व निवछावर करने के लिए तैयार हो गए हैं।
भारत की वर्तमान स्थिति उसी समय का नतीजा – सीएम योगी
न केवल भारत में बल्कि म्यांमार में सिंगापुर में और दुनिया के तमाम देशों में उन्होंने इस लड़ाई को प्रखरता के साथ प्रभावी ढंग से आगे बढ़ने का काम किया । आज यही कारण है कि हर भारतवासी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति बड़ा श्रद्धा और सम्मान का भाव रखता है यह हमारा सौभाग्य है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को देश के अंदर पराक्रम दिवस के रूप में आयोजित करने और एक सप्ताहिक आयोजन इसके साथ जोड़ने का कार्यक्रम बनाया है। नेताजी भारत के शौर्य और पराक्रम के प्रतीक रहे हैं और उन्होंने भारत की युवाओं को भारत के पराक्रम के साथ जोड़ने का काम किया आज जब हम उनकी 127वीं पावन जयंती के अवसर पर नेताजी का स्मरण कर रहे हैं इस अवसर पर हमारी सुरक्षा की रणनीति क्या होनी चाहिए आंतरिक हो या बाहरी सुरक्षा इस स्थितियों में सक्षम भारत हम सबके सामने हैं।
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पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा
एक नए भारत के रूप में पूरी दुनिया भारत को देख रही है या वर्ड पावर के रूप में स्थापित होना है भारत की वर्तमान स्थिति को इस पराक्रमी भारत के माध्यम से आगे बढ़ाने के प्रेरणा स्रोत नेताजी सुभाष चंद्र बोस हैं और मैं इस अवसर पर उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए नेताजी को देश के लिए उनकी सेवाओं को कोटि-कोटि नमन करूंगा और देश के सभी युवाओं को आवाहन करूंगा कि मातृभूमि के लिए हम जो भी कर पाएंगे वह काम होगा और इस दृष्टि से आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है की हर व्यक्ति अपने-अपने कर्तव्यों का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करें जो जिस क्षेत्र में है अगर छात्र है तो पूरी तन मेहता के साथ अध्ययन करें नई चीजों को सीखने की जिज्ञासा उसके अंदर होनी चाहिए समाज में जो भी जिस क्षेत्र का है वह अपने-अपने जिम्मेदारियां कर्तव्यों का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करता है तो नेताजी के प्रति यह हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।पहले इस दिन को सुभाष चंद्र जयंती के नाम से सेलिब्रेट किया जाता था लेकिन वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन को नेताजी के योगदान को देखते हुए पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इसके बाद से हर वर्ष नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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