सद्भावना आवाज़
बलरामपुर
अयोध्या के भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को अब कुछ ही दिन शेष हैं।ऐसे में मंदिर निर्माण के पीछे के संघर्ष को भुला पाना हर एक रामभक्त के लिए बेहद ही मुश्किल है। 500 वर्षों के संघर्ष के बाद आज अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर का निर्माण हो रहा है जो की पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। मंदिर निर्माण का स्वप्न आज लाखों कारसेवकों के कठिन संघर्ष और बलिदान की बदौलत ही पूर्ण होता दिख रहा है। अयोध्या में सन 1992 में मंदिर निर्माण के लिए लाखों कारसेवक उमड़े थे।

छात्र जीवन में ही की कारसेवकों की सेवा
6 दिसंबर को जब विवादित ढांचा गिराया गया तो उसमे जिला बलरामपुर के भी तमाम कारसेवकों ने हिस्सा लिया था। कारसेवा में जिले के सर्वेश सिंह जो उस समय परिवार के साथ वहां रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे थे उन्होंने भी इसमें हिस्सा लिया। सन 1992 की घटना को याद कर उन्होंने कुछ बाते साझा करते हुए यह कहा वह उस समय छोटी देवकाली के पास भीखूशाह मंदिर में अपने परिवार संग रहा करते थे। सर्वेश सिंह का कहना है की उस दौरान जब विवादित ढांचा गिराया गया तो कारसेवकों के ऊपर गोली भी चलाई गई थी, जिसमे सर्वप्रथम वासुदेव गुप्ता को गोली लगी क्योंकि हमलोग एक ही टोली के सदस्य थे। ऐसा देख हमलोग ने आनन फानन में उन्हें अस्पताल पहुंचाया। सर्वेश सिंह ने यह भी बताया की मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी उमा भारती की अयोध्या में हुई गिरफ्तारी के वक्त भी हमलोग करसेवा में लीन थे।

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हर पल रामभक्त के लिए सुखदाई
सर्वेश सिंह ने कहा की उस दौरान देश के अलग अलग हिस्से से कारसेवक अयोध्या पहुंचे थे, और मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष भी कर रहे थे। कारसेवकों पर हुए लाठी चार्ज और गोली बारी में कई कारसेवक गंभीर रूप से घायल हो गए थे जिन्हे मौके पर अस्पताल पहुंचाया। यहां तक की कारसेवकों को घर लाकर भी उनकी सेवा की, तथा उनके भोजन का भी प्रबंध किया। सर्वेश सिंह उस समय को याद कर भावुक भी हुए तथा यह भी कहा की 22 जनवरी को मंदिर में जब रामलला विराजमान होंगे यह पल हर रामभक्त के लिए सुखदाई होगा क्योंकि हर भारतवासी 500 वर्षों से यह स्वप्न देख रहा था की उनके प्रभु कब अपने घर में विराजमान होंगे। सर्वेश सिंह ने यह बताया की संघर्ष के दौरान उनके द्वारा की गई कारसेवा से उन्हें काफी आनंद प्राप्त होता था।

