आजमगढ़/उत्तर प्रदेश। जिले की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रखने वाले यादव परिवार से आने वाले युवा नेता दिनेश कुमार यादव अब नई भूमिका में नजर आ रहे हैं। परिवार जहां संगठन और पंचायत राजनीति में मजबूत पकड़ रखता है, वहीं दिनेश यादव ने खुद को जनसरोकारों और वैचारिक राजनीति से जोड़ते हुए अलग पहचान बनाई है।सरकारी नौकरी छोड़ने के बाद वे लगातार जनता के बीच सक्रिय हैं। अब उन्होंने जिले में गांव-गांव जाकर लोगों को संविधान, अधिकारों और सामाजिक न्याय के प्रति जागरूक करने का अभियान शुरू करने की तैयारी की है।दिनेश कुमार यादव पहले स्वास्थ्य विभाग में नेत्र परीक्षण अधिकारी के पद पर तैनात थे। सुरक्षित नौकरी और स्थिर भविष्य होने के बावजूद उन्होंने वर्ष 2021 में नौकरी छोड़ दी।करीबी बताते हैं कि उनका मानना था कि नौकरी से व्यक्तिगत जीवन सुधर सकता है, लेकिन राजनीति और सामाजिक जीवन के जरिए हजारों लोगों के जीवन में बदलाव लाया जा सकता है। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने पूर्णकालिक रूप से जनसेवा और राजनीति का रास्ता चुना।दिनेश कुमार यादव समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता हवलदार यादव के भतीजे हैं। हवलदार यादव वर्ष 2005 में जिला पंचायत अध्यक्ष रहे। इसके बाद 2011 से अब तक समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।जिले में संगठन विस्तार और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ के कारण उन्हें सपा का बड़ा चेहरा माना जाता है। वे नेताजी मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के सांसद प्रतिनिधि भी रह चुके हैं।
भाभी भी संभाल चुकी हैं पंचायत की कमान
परिवार की राजनीतिक ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिनेश यादव की भाभी मीरा यादव वर्ष 2011 से 2021 तक जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं।लगातार दस वर्षों तक पंचायत की कमान संभालते हुए उन्होंने ग्रामीण विकास और पंचायत योजनाओं में अहम भूमिका निभाई।

युवाओं के बीच बढ़ी सक्रियता
दिनेश यादव को वर्ष 2023 में समाजवादी युवजन सभा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद उनकी सक्रियता प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक बढ़ी।वे रोजगार, शिक्षा, युवाओं की भागीदारी और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर लगातार मुखर रहे हैं। जिले में युवा वर्ग के बीच उनकी पहचान तेजी से मजबूत हुई है।दिनेश यादव अब आजमगढ़ में ‘समाजवाद और संविधान’ विषय पर कार्यशालाएं आयोजित करेंगे। इन कार्यक्रमों में युवाओं, छात्रों, किसानों और गरीब तबके को संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, आरक्षण, लोकतंत्र और नागरिक जिम्मेदारियों की जानकारी दी जाएगी।उनका कहना है कि जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति अपने अधिकार नहीं समझेगा, तब तक लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता।
सादगी बनी पहचान
दिनेश यादव लगातार गांवों में चौपाल, सामाजिक कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों में सक्रिय रहते हैं। स्थानीय लोग उन्हें सहज, सुलभ और जमीन से जुड़ा नेता बताते हैं।कम समय में उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक और सामाजिक पहचान बनाई है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जहां ज्यादातर नेता चुनावी समीकरणों तक सीमित हैं, वहीं दिनेश यादव वैचारिक मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं।अगर उनका संविधान जागरूकता अभियान सफल रहा तो आने वाले समय में वे आजमगढ़ की राजनीति में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

