सद्भावना आवाज़
गोंडा।
शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय गौरिया में नहीं पढने आते बच्चे सन् 1979 का बना विद्यालय को जर्जर भवन किया जा चुका है घोषित, बगल के प्राइवेट विद्यालय खु्लने से नहीं हो पाता बच्चों का एडमिशन गांव में ही खुले हैं। प्राइवेट विद्यालय प्रधानाध्यापक आशुवेंद्र सिंह ने बताया पंजीकृत हैं 43 बच्चे विद्यालय के पास नहीं है अपना भवन विवाद के चलते पठन पाठन में हो रही समस्या विभाग के जिम्मेदार मौन प्राइवेट विद्यालयो बच्चों का लगा रहता है जमवाड़ा क्षेत्र में चर्चित है। विद्यालय प्रधानाध्यापक सहित तीन अध्यापक ले रहे वेतन अपनी जिम्मेदारी से है बेपरवाह।
मिली जानकारी अनुसार शिक्षा क्षेत्र के अधिकारी व सरकार के लोगो द्वारा विभिन्न माध्यमों से स्कूल चलो अभियान चलाया जा रहा है जिसमें सरकारी धन बर्बाद हो रहे जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा खर्च हो रहा फिर भी अपनी जिम्मेदारी से दूर भाग रहे प्रधानाध्यापक नहीं आते पढ़ने बच्चे विद्यालय का भवन जर्जर हालत में हैं घोषित भी किया गया है।
पुरा मामला शिक्षा क्षेत्र का बहुचर्चित गौरिया प्राथमिक विद्यालय का है गांव वालों की माने तो इस विद्यालय की स्थापना 1979 में बच्चों के पठन पाठन के लिए किया गया है तब शिक्षा की अलख जगाई थी लोग खुश पर आज करीब 50साल बाद इस विद्यालय में बच्चे पढ़ने नहीं आते वजह भी अलग अलग विद्यालय का। पुराना भवन जर्जर हालत में है यहां पर शिक्षक व प्रधानाध्यापक आते रोज है पर बच्चों को विद्यालय में प्रवेश के नाम पर बचकाना जवाब।
प्रधानाध्यापक आशुवेंद्र सिंह ने बताया कि भवन जर्जर हालत में सुधार नहीं होने से लोग अपने बच्चों का एडमिशन नहीं करा रहे हैं जो नाम पंजीकृत हैं वह आते ही नहीं जबकि इस विद्यालय में तीन अध्यापक व एक शिक्षामित्र तैनात हैं सरकार की योजनाओं का यहां कोई असर नहीं दिख रहा विद्यालय में मौजूद दुसरे अध्यापक सौरभ मिश्रा ने बताया कि बगल में ही दो दो प्राइवेट विद्यालय मौजूद हैं इसलिए बच्चे नहीं आ पा रहे हैं इनकी शिकायत भी किया गया पर विभाग के जिम्मेदार कोई कदम नहीं उठाए जिससे हम सब कुछ नहीं कर सकते हैं जबकि तीसरे अध्यापक अजय विद्यालय काम से बाहर जाने जानकारी प्रधानाध्यापक ने दी गांव के रहने वाले लोगों का कहना है कि विद्यालय का भवन आगे विवादित जमीन है जिसका विवाद न्यायालय में चल रहा है पर अध्यापक व प्रधानाध्यापक भी खुब खिलवाड़ करते हैं सरकार की कोई भी योजनाओं का कोई मतलब नहीं दिख रहा है।
फिलहाल एमडीएम का पैसा भी रिलीज होता है बच्चे पढ़ने नहीं आते हैं सरकार। के पैसे का दुरुपयोग देखना हो तो गौरिया गांव का प्राथमिक विद्यालय जो कि मधवापुर मनकापुर रोड से वजीरगंज जाने वाले मार्ग पर बसे इस विद्यालय पर आना होगा इससे विद्यालय में मनमानी और मौज दोनों देखने को मिल जाएगा इस पुराने विद्यालय का आंगन बच्चों से कब खिलखिलाएगा यह देखने वाली बात है अब सरकार व शिक्षा विभाग के जिम्मेदार कब कैसे मेहरबान होंगे इसका गांव वालों को बेसब्री से इंतजार रहेगा ।
शिक्षा क्षेत्र में प्राइवेट स्कूलों की स्थिति जहां मजबूत होती जा रही है वहीं सरकारी स्कूलों में शिक्षा के प्रति जागरूकता अभियान रैली अभियान शिक्षकों का पढ़ाई-लिखाई छोड़कर सरकार योजनाओं को पुरा कर अधिकारियों की जी हुजूरी में समय बीत रहा है एक शिक्षक ने नाम ना जाने क्या की शर्त पर बताया कि विभाग का नया नया फरमान शिक्षकों के लिए गले की फांसी बना हुआ है पढ़ाई-लिखाई छोड़कर शिक्षक सब करना जरूरी है अब शिक्षक मजबूर हो गए हैं।
विभाग प्राइवेट स्कूलों पर रोक लगाने के लिए हर साल फरमान जारी कर वसूली में लग जाता है मानकविहीन स्कूलों में अभिभावकों का शोषण बदस्तूर जारी है क्षेत्र में ही सरकार की माने तो एक दर्जन गैर मान्यता प्राप्त संस्थान चल रहे हैं जबकि आम लोगों की व सरकारी अधिकारियों की माने तो सैकड़ों स्कूल बिना मान्यता के धड़ल्ले से चल रहे ।जिले के नये जिलाधिकारी नेहा शर्मा से जनता को उम्मीद जगी है कि कब वह शिक्षा विभाग का रुख कर ठोस कदम उठाती हैं शिक्षा क्षेत्र के अधिकारी फोन उठाना नहीं चाहते जवाबदेही जिम्मेदारी तो दूर की गुहार है