सद्भावना आवाज़
बलरामपुर।
श्रावस्ती लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने बसपा से निष्कासित राम शिरोमणि वर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है। खास बात यह है कि ब्राह्मण चेहरे के सामने सपा ने ओबीसी प्रत्याशी पर भरोसा जताया है। अखिलेश ने बसपा में 25 साल तक रहे राम शिरोमणि वर्मा पर भरोसा जताकर बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। PDA के फार्मूले पर फोकस करते हुए अखिलेश ने ओबीसी में वर्मा वर्ग पर विश्वास किया है।

2019 में सपा- बसपा गठबंधन से जीते थे सांसद
राम शिरोमणि वर्मा 2019 लोकसभा चुनाव में सपा बसपा के संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर जीते थे। बसपा से निष्कासित राम शिरोमणि वर्मा को चुनाव मैदान में श्रावस्ती लोकसभा सीट पर P.D.A फार्मूले को अपनाया है। अगर 2019 आम चुनाव की बात करें तो सपा बसपा के संयुक्त उम्मीदवार राम शिरोमणि वर्मा को 44.31 वोट मिले थे। जबकि भाजपा उम्मीदवार दद्दन मिश्रा को 43.78%मिले थे। राजनीतिक जानकार का दावा है कि साल 2019 के चुनाव में बीजेपी का उम्मीदवार की वजह से 1. 72% नोट के वोट की वजह से चुनाव हार गया हार गए थे। ऐसे में ऐसे में बीजेपी की खिलाफ एंटी इनकंपेंसी का फायदा उठाते हुए सपा ने राम शिरोमणि वर्मा पर भरोसा जताया है। श्रावस्ती के इतिहास में 2009 से अब तक कोई भी राजनीतिक दल दोबारा चुनाव नहीं जीता है।

बसपा ने कर दिया था निष्कासित
गत 23 मार्च को बहुजन समाज पार्टी ने राम शिरोमणि वर्मा और उनके भाई पार्टी नेता राम सुरेश वर्मा को बसपा ने निष्कासित कर दिया है। अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए जिला कमेटी ने यह कार्रवाई की थी। चुनाव जीतने के बाद वह राम शिरोमणि वर्मा लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे। हर छोटे-बड़े आयोजनों में उनकी सहभागिता ने लोगों में अपना विश्वास कायम रखा। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी घोषित किया है।
साल 2014 में मोदी लहर में जीती बीजेपी
भाजपा के दद्दन मिश्र ने बाहुबली अतीक अहमद को 85 हजार 913 मत से हराया। तीन लाख 45 हजार 964 मत प्राप्त कर भाजपा उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। दूसरे स्थान पर सपा, बसपा को तीसरा स्थान व पीस पार्टी इस चुनाव में चौथे स्थान पर रही। कांग्रेस को पांचवें स्थान से संतोष करना पड़ा था। तीसरा चुनाव वर्ष 2019 में हुआ। इस बार सपा-बसपा में गठबंधन के बाद यह सीट बसपा के खेमे में गई। कुल 11 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे। गठबंधन से बसपा ने राम शिरोमणि वर्मा को उम्मीदवार बनाया। भाजपा से दद्दन मिश्र दूसरी बार मैदान में थे। कांग्रेस ने चेहरा बदलकर धीरेंद्र प्रताप सिंह को मैदान में उतारा। इसका परिणाम आया तो बसपा उम्मीदवार ने पांच हजार 320 मतों से भाजपा को शिकस्त दी।
चुनाव के इतिहास को देखते हुए बीजेपी ने बदला उम्मीदवार
श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं का अंदाज भी निराला है। अब तक के इतिहास पर नजर डालें तो यहां हर चुनाव के बाद सांसद के चेहरे बदलते रहे हैं। नए परिसीमन के बाद अब तक हुए कुल तीन चुनाव में कांग्रेस भाजपा व बसपा के खेमे के सांसद चुने जा चुके हैं। इस प्रकार परिणाम ने सांसद का चेहरा बदल दिया। चौथे चुनाव की घोषणा हो चुकी है। भाजपा ने एमएलसी साकेत मिश्र को उम्मीदवार घोषित किया है। सपा-कांग्रेस में गठबंधन के बाद सीट सपा के हिस्से में आई है। ऐसे में सपा-बसपा का उम्मीदवार कौन होगा, निर्दल दावेदार कौन-कौन हो सकते हैं, इस पर चर्चा करते हुए मतदाता चुनाव के समीकरण बना रहे हैं। चौथी बार बिछ रही चुनाव की बिसात के साथ ही कौन अगला सांसद होगा।
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