बलरामपुर। नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर जिले के 233 बिना मान्यता वाले मदरसों की फंडिंग की जांच अब तक शुरू नहीं हो सकी है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने इस मामले की जांच के लिए नवंबर 2024 में आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) को पत्र भेजा था, लेकिन चार महीने बीतने के बाद भी एटीएस की टीम जिले में नहीं पहुंची है। मदरसों की आय के स्रोतों और अवैध छात्रावासों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अभी तक कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं।बलरामपुर जिले में कुल 695 मदरसे संचालित हो रहे हैं। इनमें से 462 मदरसों को सरकारी मान्यता प्राप्त है, जबकि 233 मदरसे बिना मान्यता के चल रहे हैं। खास बात यह है कि ये मदरसे नेपाल सीमा से सटे संवेदनशील इलाकों में स्थित हैं। सवाल यह है कि इन मदरसों को आर्थिक सहायता कहां से मिल रही है और इनके संचालन का खर्च कौन उठा रहा है। बिना मान्यता के मदरसों का इस तरह संचालन सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।
अवैध छात्रावासों की पोल खोलेगी जांच
जिले में करीब 100 से अधिक मदरसों में अवैध रूप से छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है। बिना किसी मान्यता और प्रशासन की जानकारी के ये छात्रावास लंबे समय से चल रहे हैं। छह महीने पहले तुलसीपुर के एक मदरसे में छात्रावास में एक छात्र ने अपने सहपाठी की धारदार हथियार से हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद प्रशासन की नींद टूटी थी, लेकिन अब तक अवैध छात्रावासों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। माना जा रहा है कि एटीएस की जांच में अवैध छात्रावासों के संचालन और इनके फंडिंग के नेटवर्क की पूरी पोल खुल सकती है।
फंडिंग पर उठ रहे सवाल
अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी यानंत कुमार मौर्य ने बताया कि नवंबर में निदेशक से मिले पत्र के बाद जिले के मदरसों की फंडिंग की जांच के लिए एटीएस को बुलाया गया था। जांच का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि बिना मान्यता के मदरसों का संचालन किसके सहयोग से हो रहा है और इसके लिए फंडिंग कहां से आ रही है। इसके अलावा, मदरसों के संचालन से जुड़े अभिलेखों की भी जांच की जाएगी।
चार महीने बाद भी नहीं आई एटीएस की टीम
प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक जे. रीभा ने नवंबर 2024 में सभी जिलों के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र जारी कर बिना मान्यता वाले मदरसों की जांच एटीएस से कराने का निर्देश दिया था। लेकिन चार महीने बाद भी एटीएस की टीम न पहुंचने से मदरसा संचालकों और विभागीय अधिकारियों ने राहत की सांस ली है।