बलरामपुर। स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सा प्रतिपूर्ति के नाम पर चल रहे कथित ‘सुविधा शुल्क’ के खेल का खुलासा उस समय हुआ, जब एंटी करप्शन टीम ने सीएमओ कार्यालय के वरिष्ठ सहायक मोहनलाल जायसवाल को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है।मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं शासन को भेजी गई रिपोर्ट में सख्त कार्रवाई की संस्तुति भी की गई है।
“फाइल आगे बढ़ानी है तो पैसे दो”
सूत्रों के अनुसार, शिकायतकर्ता की चिकित्सा प्रतिपूर्ति की फाइल लंबे समय से लंबित थी। आरोप है कि फाइल को आगे बढ़ाने और भुगतान प्रक्रिया पूरी कराने के बदले वरिष्ठ सहायक द्वारा पांच हजार रुपये की मांग की गई थी।पीड़ित ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन टीम से की। शिकायत की पुष्टि के बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप बिछाया।
नोट हाथ में आते ही दबोचा
21 मई को एंटी करप्शन टीम ने सीएमओ कार्यालय के आसपास निगरानी शुरू की। जैसे ही आरोपी ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम ली, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही पकड़ लिया।कार्रवाई के दौरान रिश्वत में लिए गए नोट, शिकायत पत्र, प्री-ट्रैप रिपोर्ट और चिकित्सा प्रतिपूर्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए। टीम को ऑडियो और वीडियो साक्ष्य भी मिले हैं, जिन्हें जांच में शामिल किया गया है।
विभागीय छवि पर लगा दाग
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने कहा कि भ्रष्टाचार के इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाया है। इसी कारण आरोपी कर्मचारी को तत्काल निलंबित कर दिया गया है।उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है और आगे की विभागीय कार्रवाई भी प्रस्तावित है।एंटी करप्शन कार्रवाई के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या चिकित्सा प्रतिपूर्ति की फाइलों में रिश्वतखोरी का यह कोई अकेला मामला है या फिर लंबे समय से ऐसा नेटवर्क सक्रिय था। जांच एजेंसियां अब आरोपी से पूछताछ कर अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर सकती हैं।

