बलरामपुर। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय और महारानी लाल कुँवरि स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को “महाकुंभ 2025 का अवदान” विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा, मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह और अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. रवि शंकर सिंह ने महाकुंभ को सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सद्भाव का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ सामुदायिक भावना को मजबूत करता है और वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति का प्रतीक है।मुख्य वक्ता प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने महाकुंभ को “वसुधैव कुटुंबकम” का साकार रूप बताते हुए इसे सनातन संस्कृति के जागरण का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में 45 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में 66 करोड़ सनातनी एक साथ स्नान कर सामाजिक समरसता का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
आस्था, विश्वास और संस्कृतियों के मिलन का पर्व
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जे. पी. पांडेय ने कहा कि कुम्भ पर्व आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। यह एक ऐसा पर्व है जो बिना किसी आमंत्रण के ही लोगों को आकर्षित करता है।संगोष्ठी के समन्वयक प्रो. प्रकाश चंद्र गिरी ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। संचालन लेफ्टिनेंट डॉ. देवेंद्र कुमार चौहान ने किया। अतिथियों का स्वागत बैज अलंकरण, माल्यार्पण, स्मृति चिन्ह और हरित पौध भेंटकर किया गया।संगोष्ठी में प्रो. राघवेंद्र सिंह, प्रो. अरविंद द्विवेदी, प्रो. पी. के. सिंह, प्रो. एस. एन. सिंह, प्रो. वीणा सिंह सहित कई विद्वानों, शिक्षकों और शोधार्थियों ने भाग लिया। इस दौरान महाकुंभ के धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं पर गहन चर्चा की गई।