लखनऊ। The Hope Rehabilitation and Learning Center ने विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2026 के अवसर पर बच्चों और उनके परिवारों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। जानकीपुरम स्थित केंद्र में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संस्था ने किफायती थेरेपी, मोबाइल सेवाएं और हेल्पलाइन शुरू करने का ऐलान किया। संस्था के प्रबंध निदेशक दिव्यांशु कुमार ने कहा कि 100 से अधिक बच्चों को मुख्यधारा में लाना केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि 100 परिवारों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आर्थिक स्थिति किसी भी बच्चे के भविष्य में बाधा नहीं बनने दी जाएगी। वहीं निदेशक एवं पीडियाट्रिक फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. प्रीति कुरील ने अर्ली इंटरवेंशन को बच्चों के जीवन में बदलाव लाने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर बताया।
बच्चे की अलग सोच ही उसकी पहचान
इसी क्रम में ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट डॉ. वेद प्रकाश ने कहा कि जब बच्चा पहली बार खुद स्कूल जाने लगता है, तो पूरा परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ता है। क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट एवं एबीए थेरेपिस्ट जॉन विलियम ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चे की अलग सोच को बोझ नहीं, बल्कि उसकी पहचान और ताकत के रूप में स्वीकार करना चाहिए।
किफायती थेरेपी और नई पहल
संस्था ने घोषणा की कि जरूरतमंद परिवारों को रियायती दरों पर थेरेपी सेवाएं दी जाएंगी और सरकारी व सामुदायिक सहयोग से इसकी लागत 50 से 70 प्रतिशत तक कम करने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही ‘Hope on Wheels’ के तहत मोबाइल थेरेपी वैन के जरिए कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवाएं पहुंचाई जाएंगी, जहां स्कूलों, अस्पतालों और आंगनवाड़ियों में निःशुल्क आकलन शिविर लगाए जाएंगे।

