गोंडा। महिला पहलवानों से जुड़े कथित यौन शोषण मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बरी होने के बाद पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। करीब साढ़े तीन साल तक कानूनी विवाद के कारण सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले बृजभूषण की भूमिका को लेकर अब देवीपाटन मंडल से लेकर लखनऊ तक चर्चाएं तेज हो गई हैं।अदालत के फैसले के बाद उनके समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताया है, वहीं राजनीतिक जानकार इसे बृजभूषण के लिए नए सियासी रास्ते खुलने के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि उनकी सक्रिय वापसी का फैसला पूरी तरह भाजपा नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर माना जा रहा है।
2024 में कटा था टिकट, बेटे को मिली थी जिम्मेदारी
महिला पहलवानों के आरोपों के बाद वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कैसरगंज सीट से बृजभूषण शरण सिंह का टिकट काटकर उनके बेटे करण भूषण सिंह को मैदान में उतारा था। पार्टी ने विवाद के बीच राजनीतिक जोखिम से बचते हुए परिवार की राजनीतिक पकड़ को भी बनाए रखा।
करण भूषण सिंह ने चुनाव जीतकर यह साबित किया कि क्षेत्र में बृजभूषण का प्रभाव और समर्थकों का आधार अब भी मजबूत है।
कानूनी विवाद के बावजूद क्षेत्र में बने रहे सक्रिय
टिकट कटने के बाद भी बृजभूषण शरण सिंह ने क्षेत्र से अपनी दूरी नहीं बनाई। गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती समेत देवीपाटन मंडल के जिलों में उनके कार्यक्रम लगातार होते रहे। सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में उनकी मौजूदगी बनी रही।अदालत से राहत मिलने के बाद विश्नोहरपुर स्थित उनके आवास और कार्यालय पर समर्थकों की भीड़ जुटी। इसे समर्थक जहां जीत का जश्न बता रहे हैं, वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है।
बृजभूषण शरण सिंह : एक नजर में राजनीतिक सफर
- जन्म: 8 जनवरी 1957, गोंडा (उत्तर प्रदेश)
- शिक्षा: साकेत पीजी कॉलेज, अयोध्या से एलएलबी
- राजनीतिक पहचान: छह बार लोकसभा सांसद रहे
- कुश्ती महासंघ: वर्ष 2012 से 2023 तक भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष रहे
सांसदी का सफर
- 1991: पहली बार गोंडा लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित
- 1999: गोंडा से दोबारा लोकसभा पहुंचे
- 2004: बलरामपुर लोकसभा सीट से सांसद बने
- 2009: समाजवादी पार्टी के टिकट पर कैसरगंज से सांसद चुने गए
- 2014: भाजपा के टिकट पर कैसरगंज से जीत दर्ज की
- 2019: कैसरगंज से दोबारा भाजपा सांसद बने
- 2024: भाजपा ने विवाद के बीच कैसरगंज सीट से उनका टिकट काटकर बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने चुनाव जीतकर परिवार की राजनीतिक पकड़ कायम रखी।
“एक बार फिर संसद जरूर जाऊंगा” बयान की बढ़ी चर्चा
बृजभूषण शरण सिंह कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि वह एक बार फिर संसद जाएंगे। उस समय इसे समर्थकों का हौसला बढ़ाने वाला बयान माना गया था, लेकिन अदालत के फैसले के बाद इस बयान के राजनीतिक मायने फिर चर्चा में हैं।समर्थकों का मानना है कि कानूनी बाधा खत्म होने के बाद उनके लिए राजनीति में बड़ी भूमिका की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
2027 और 2029 के चुनावों को लेकर अटकलें
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक भाजपा उन्हें वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में संगठनात्मक जिम्मेदारी देकर देवीपाटन मंडल और पूर्वांचल में सक्रिय भूमिका दे सकती है। वहीं 2029 के लोकसभा चुनाव में उनकी संभावित वापसी को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक उनकी भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
देवीपाटन मंडल में मजबूत पकड़ बड़ी ताकत
बृजभूषण शरण सिंह की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उनका क्षेत्रीय नेटवर्क माना जाता है। वर्षों की राजनीति के दौरान उन्होंने गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती में मजबूत जनाधार तैयार किया है।
परिवार की राजनीतिक मौजूदगी भी कायम है। बेटे करण भूषण सिंह कैसरगंज से सांसद हैं, जबकि बेटे प्रतीक भूषण सिंह गोंडा से विधायक हैं।
अब निगाहें भाजपा के अगले कदम पर
अदालत के फैसले ने बृजभूषण शरण सिंह के लिए कानूनी चुनौती को खत्म कर दिया है, लेकिन उनकी राजनीतिक भूमिका अभी तय नहीं हुई है। आने वाले समय में भाजपा उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी देती है या परिवार तक ही सीमित रखती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।फिलहाल इतना तय है कि अदालत से मिली राहत के बाद बृजभूषण शरण सिंह की सियासत में दोबारा सक्रियता को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
