बलरामपुर । नगर क्षेत्र में बिजली व्यवस्था सुधारने और हादसों पर रोक लगाने के लिए वर्ष 2019-20 में भेजी गई 215 करोड़ रुपए की अंडरग्राउंड बिजली केबल योजना आज तक मंजूरी का इंतजार कर रही है। सात साल बीत जाने के बाद भी योजना फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी है। नतीजा यह है कि शहर के मुख्य बाजारों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और रिहायशी क्षेत्रों में आज भी जर्जर तारों का मकड़जाल फैला हुआ है, जिससे लोगों की जान जोखिम में बनी हुई है।नगर पालिका परिषद बलरामपुर क्षेत्र में बिजली लाइनों को भूमिगत करने के लिए यह महत्वाकांक्षी प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था। योजना के तहत 33 केवी, 11 केवी और एलटी लाइनों को भूमिगत किया जाना था, लेकिन मंजूरी न मिलने से पूरा प्रोजेक्ट अधर में लटक गया।
दुकानों के ऊपर लटक रहे तार
नगर के मुख्य बाजारों, होटल-रेस्टोरेंट क्षेत्रों और व्यावसायिक इलाकों में दुकानों के सामने बिजली के पुराने तार झूल रहे हैं। कई जगह तार आपस में उलझे हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हल्की हवा, बारिश या शॉर्ट सर्किट होने पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में हजारों लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में यदि हाईटेंशन तार टूटकर गिर जाए या आग लग जाए तो बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता।
लो वोल्टेज और लोकल फॉल्ट से लोग परेशान
योजना लागू न होने से शहरवासियों को आज भी लो वोल्टेज, बार-बार ट्रिपिंग और लोकल फॉल्ट जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। कई मोहल्लों में मामूली खराबी होने पर घंटों बिजली गुल रहती है। कारोबारियों का कहना है कि बिजली कटौती और वोल्टेज की समस्या से व्यापार भी प्रभावित होता है।
दो लाख आबादी को मिलती राहत
जानकारों के मुताबिक यदि इस योजना को समय रहते मंजूरी मिल जाती तो नगर की करीब दो लाख आबादी को राहत मिलती। भूमिगत लाइनें होने से बिजली आपूर्ति बेहतर होती, फॉल्ट कम होते और हादसों पर भी अंकुश लगता।
केंद्र से 60% और राज्य से 40% धनराशि मांगी गई थी
यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत भेजा गया था। तत्कालीन नोडल अफसर एवं जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने योजना के लिए केंद्र सरकार से 60 फीसदी और राज्य सरकार से 40 फीसदी धनराशि की मांग की थी। कुल 2 अरब 15 करोड़ 17 लाख रुपए के इस प्रस्ताव पर आज तक स्वीकृति नहीं मिल सकी।
हर बड़े हादसे के बाद भी नहीं जाग रहा विभाग
शहर और आसपास क्षेत्रों में बिजली से जुड़ी घटनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग कोई सबक लेता नजर नहीं आ रहा। लोगों का कहना है कि जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होगा, तब तक शायद सिस्टम नहीं जागेगा।
शहरवासियों की मांग- जल्द मिले मंजूरी
नगरवासियों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने शासन से लंबित योजना को तत्काल मंजूरी देने की मांग की है। उनका कहना है कि शहर की सुरक्षा, बेहतर बिजली व्यवस्था और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अंडरग्राउंड केबल परियोजना अब बेहद जरूरी हो चुकी है।
