लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में रिश्वतखोरी के मामले की जांच में वसूली के एक संगठित नेटवर्क के संकेत मिले हैं। विजिलेंस की शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि गिरोह पहले निर्माणाधीन भवनों को निशाना बनाता था, फिर आईजीआरएस पोर्टल पर अवैध निर्माण की शिकायत दर्ज कराकर भवन मालिकों पर दबाव बनाया जाता था।जांच के मुताबिक, शिकायत दर्ज होने के बाद भवन स्वामियों से संपर्क कर कार्रवाई का डर दिखाया जाता था। जुर्माना, मुकदमा और बुलडोजर कार्रवाई का भय दिखाकर मामले को खत्म करने के नाम पर रिश्वत की मांग की जाती थी। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे खेल में एलडीए के कुछ कर्मचारी और बाहरी दलालों की भूमिका की जांच की जा रही है।
निर्माण स्थलों की पहले होती थी पहचान
सूत्रों के मुताबिक, गिरोह के सदस्य पहले निर्माणाधीन मकानों और भवनों की जानकारी जुटाते थे। इसके बाद उनकी जानकारी संबंधित लोगों तक पहुंचाई जाती थी। फिर दलालों के माध्यम से आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज कराई जाती थी।शिकायत के बाद भवन मालिकों को कार्रवाई का डर दिखाकर रकम देने के लिए मजबूर करने का आरोप है। विजिलेंस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस तरीके से कितने लोगों से वसूली की गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
शिकायतों की होगी जांच, बाहरी लोगों पर रोक
मामला सामने आने के बाद एलडीए ने शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब आईजीआरएस, व्हाट्सएप और अन्य माध्यमों से मिलने वाली शिकायतों पर सीधे कार्रवाई नहीं होगी। पहले शिकायतों की सत्यता की जांच की जाएगी, इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।वहीं, प्रवर्तन अनुभाग के कार्यालयों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
वसूली करने वालों पर होगी एफआईआर
एलडीए अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों को किसी भी व्यक्ति को परेशान करने या ब्लैकमेल करने का जरिया नहीं बनने दिया जाएगा। निजी रंजिश या अवैध वसूली की नीयत से बार-बार शिकायत करने वालों को चिह्नित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।उधर, विजिलेंस टीम एलडीए के अवर अभियंता समेत गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। आने वाले दिनों में मामले में और कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

