बलरामपुर। माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के नवस्थापित परिसर में शनिवार को पहली बार प्री-पीएचडी कोर्सवर्क परीक्षा आयोजित की गई। विश्वविद्यालय के इतिहास में यह पहला अवसर रहा, जब परिसर में पीएचडी शोधार्थियों के लिए कोर्सवर्क परीक्षा संपन्न कराई गई। परीक्षा शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित हुई। पंजीकृत 147 शोधार्थियों में से 145 ने परीक्षा दी, जबकि दो अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।
147 में 145 शोधार्थियों ने दी परीक्षा
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार परीक्षा का आयोजन सभी शैक्षणिक एवं परीक्षा संबंधी मानकों के अनुरूप किया गया। सभी परीक्षा कक्षों में पहले से आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं, जिससे शोधार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। पूरी परीक्षा के दौरान अनुशासन और गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा गया।
कुलपति ने कहा- शोध को मिलेगी नई दिशा
परीक्षा के दौरान कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह ने परीक्षा केंद्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने परीक्षा संचालन में लगे अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार और उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि पहला प्री-पीएचडी कोर्सवर्क बैच भविष्य में उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्यों की मजबूत आधारशिला बनेगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तैयार होंगे शोधार्थी
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शोधार्थियों को आधुनिक संसाधन, सक्षम मार्गदर्शन और अनुसंधान के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। इससे शोधार्थी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप समाजोपयोगी और गुणवत्तापूर्ण शोध कर सकेंगे। उन्होंने इसे विश्वविद्यालय के नवस्थापित परिसर की ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए शैक्षणिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
इन अधिकारियों ने संभाली परीक्षा की जिम्मेदारी
परीक्षा के सफल संचालन में प्रो. राघवेंद्र सिंह ने केंद्राध्यक्ष, जबकि प्रो. विमल प्रकाश वर्मा एवं डॉ. बसंत कुमार ने सहायक केंद्राध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई। परीक्षा नियंत्रक दिनेश कुमार मौर्य और कुलसचिव परमानंद सिंह ने सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और शोधार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय भविष्य में भी उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

