लखनऊ । 81 दिवसीय गौ रक्षार्थ धर्मयुद्ध गविष्ठी यात्रा के समापन के बाद गौ संरक्षण आंदोलन ने नए चरण में प्रवेश कर लिया है। शुक्रवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित “गौ गर्जना अक्षौहिणी संकल्प सभा” में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आंदोलन की आगामी रणनीति का ऐलान किया।सभा में शंकराचार्य ने गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग दोहराते हुए कहा कि गौ संरक्षण को लेकर अब अभियान को देश के हर गांव तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था और सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं।शंकराचार्य ने घोषणा की कि 17 नवंबर 2026 को गोपाष्टमी के अवसर पर लखनऊ में बड़ा आयोजन किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के करीब 1 लाख 7 हजार गांवों से गौ संरक्षण के संकल्प के साथ लोग लखनऊ पहुंचेंगे।उन्होंने कहा कि इस बार आंदोलन को लेकर सरकार से अनुमति नहीं मांगी जाएगी। आयोजन स्थल और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर सरकार से सहयोग की अपेक्षा जताई गई।
अगस्त से नवंबर तक चरणबद्ध कार्यक्रम
शंकराचार्य ने बताया कि आंदोलन को विस्तार देने के लिए अगस्त से नवंबर तक कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।उन्होंने बताया कि 14 से 17 अगस्त तक छत्तीसगढ़ के सलधा में प्रतिनिधियों का सम्मेलन और प्रशिक्षण शिविर आयोजित होगा। इसके बाद देशभर में “एक नोट अभियान” और गौ सम्मान अभियान चलाया जाएगा।इसके साथ ही 30 जुलाई से 11 अगस्त तक “एक कांवड़-एक गायक” अभियान के माध्यम से लोगों को गौ संरक्षण से जोड़ने की योजना है।

काशी में होगा 11 दिवसीय गौ प्रतिष्ठा यज्ञ
शंकराचार्य ने बताया कि शारदीय नवरात्र के दौरान काशी में 11 दिवसीय गौ प्रतिष्ठा यज्ञ आयोजित किया जाएगा। इस दौरान गौ संरक्षण को लेकर लोगों को संकल्प दिलाया जाएगा।उन्होंने कहा कि कार्तिक शुक्ल पक्ष में गांवों से प्रतीकात्मक यात्राएं निकाली जाएंगी, जो गोपाष्टमी के दिन लखनऊ पहुंचेंगी।
लखनऊ के बाद दिल्ली की ओर बढ़ेगा अभियान
सभा में शंकराचार्य ने कहा कि लखनऊ कार्यक्रम के बाद आंदोलन का अगला चरण शुरू होगा। एक टोली दिल्ली की ओर जाएगी, जबकि दूसरी टोली उत्तर प्रदेश के गांवों में पहुंचकर गौ संरक्षण को लेकर जनजागरण करेगी।सभा में मौजूद संतों, गौभक्तों और कार्यकर्ताओं ने गौ संरक्षण अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। आयोजकों ने इसे भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और परंपराओं से जुड़ा राष्ट्रव्यापी अभियान बताया।

