अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में इस वर्ष सावन झूलनोत्सव पहले से अधिक भव्य और ऐतिहासिक होने जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से पहली बार रामलला की पालकी यात्रा मणिपर्वत मेले तक निकालने की तैयारी की जा रही है। यदि यह प्रस्ताव अंतिम रूप लेता है, तो यह राम मंदिर के इतिहास में पहली ऐसी यात्रा होगी।श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने झूलनोत्सव की तैयारियां तेज कर दी हैं। 15 अगस्त से शुरू होने वाले इस 13 दिवसीय उत्सव में रामलला और उनके चारों भाई रजत (चांदी) के हिंडोले पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। भक्त करीब 20 फीट की दूरी से झूला विहार के दर्शन कर सकेंगे।
13 दिन तक रजत हिंडोले पर विराजेंगे रामलला
परंपरा के अनुसार सावन शुक्ल तृतीया पर मणिपर्वत मेले के साथ झूलनोत्सव की शुरुआत होती है। इस अवसर पर अयोध्या के प्रमुख मंदिरों और मठों से भगवान की उत्सव प्रतिमाओं की शोभायात्राएं निकलती हैं। सजे-धजे रथों और पालकियों में विराजमान विग्रहों को मणिपर्वत ले जाकर प्राचीन बरगद के नीचे स्थापित झूले पर विराजमान कराया जाता है।
20 फीट दूर से श्रद्धालु करेंगे दर्शन
इस बार राम मंदिर में पहली बार रामदरबार के लिए अलग झूलनोत्सव का भी आयोजन होगा। इसके लिए विशेष रूप से नया झूला तैयार कराया जा रहा है। ट्रस्ट का उद्देश्य श्रद्धालुओं को दिव्य और भव्य आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना है।
