लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों को बंद किए जाने के विपक्ष के आरोपों पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने मंगलवार को विधान परिषद में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने किसी भी परिषदीय विद्यालय को बंद नहीं किया है। विद्यालयों के पेयरिंग को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य स्कूलों को बंद करना नहीं, बल्कि संसाधन बढ़ाकर शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है। मंत्री ने कहा कि एक ही परिसर में संचालित विद्यालयों को बेहतर प्रबंधन और संसाधनों के सही उपयोग के लिए कंपोजिट विद्यालयों के रूप में संचालित किया गया है। वर्ष 2019 में ऐसे 25,578 विद्यालयों के प्रशासनिक एकीकरण का निर्णय लिया गया था। इनमें प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय एक ही परिसर में चल रहे थे।
पेयरिंग वाले विद्यालयों में जारी हैं बाल वाटिकाएं
संदीप सिंह ने कहा कि 50 से कम छात्र संख्या और एक किलोमीटर की दूरी के दायरे वाले विद्यालयों में पेयरिंग की व्यवस्था की गई थी। इन विद्यालयों का यू-डायस कोड समाप्त नहीं किया गया है। वहां बाल वाटिकाएं संचालित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 71,877 बाल वाटिकाएं चल रही हैं। प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने के लिए 19,484 ईसीसीई एजुकेटर्स की नियुक्ति की गई है।
स्कूलों में सुविधाएं 36 से बढ़कर 96 प्रतिशत हुईं
बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं की कमी थी। सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों में तेजी से सुधार कराया। 19 मानकों पर मिलने वाली सुविधाएं वर्ष 2017 में करीब 36 प्रतिशत थीं, जो अब बढ़कर 96 प्रतिशत हो गई हैं। उन्होंने बताया कि स्कूलों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा और शिक्षकों के काम को आसान बनाने के लिए मानव संपदा पोर्टल जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
1.43 करोड़ से अधिक बच्चे कर रहे पढ़ाई
मंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों से परिषदीय विद्यालयों में अभिभावकों का भरोसा बढ़ा है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 1 करोड़ 43 लाख 34 हजार विद्यार्थी नामांकित हैं। इनमें 73.94 लाख बालिकाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों को समय पर किताबें उपलब्ध कराई जा रही हैं। यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री के लिए डीबीटी के माध्यम से प्रति विद्यार्थी 1200 रुपये अभिभावकों के खाते में भेजे जा रहे हैं।
शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का बढ़ाया मानदेय
संदीप सिंह ने कहा कि सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के हित में भी फैसले लिए हैं। शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये और अनुदेशकों का मानदेय 9 हजार से बढ़ाकर 17 हजार रुपये किया गया है। इसके अलावा शिक्षकों और कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी गई है, जिसका लाभ 12 लाख 28 हजार 587 लोगों को मिल रहा है।
शहरों में शिक्षकों की कमी दूर करने की तैयारी
मंत्री ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 11,508 शिक्षकों की नियुक्ति का अधियाचन भेजा गया है। वहीं श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं और हर जिले में दो-दो सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य परिषदीय विद्यालयों को बंद करना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर सुविधाओं से लैस कर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

