नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले 26 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। अनशन खत्म करने के बाद उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी तीन प्रमुख मांगों और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को शर्तों में शामिल न करने की वजह स्पष्ट की। वांगचुक ने कहा कि आंदोलन को आगे तक ले जाने के लिए उनका जीवित रहना जरूरी था। उन्होंने कहा कि सरकार यदि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं देती है तो इससे छात्रों का नहीं, बल्कि सरकार की साख को नुकसान होगा।वांगचुक ने बताया कि भाजपा नेताओं की ओर से तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया। उनके अनुसार सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यह था कि आंदोलन में शामिल छात्रों पर कोई गंभीर एफआईआर दर्ज न हो, ताकि उनका भविष्य प्रभावित न हो। इसके अलावा नीट पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने और संसद में इस पूरे मामले पर चर्चा कराने का भी भरोसा दिया गया।
06 जून से शुरू हुआ था आंदोलन
नीट पेपर लीक के विरोध में दिल्ली में 06 जून से छात्रों का प्रदर्शन जारी था। 28 जून को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इस आंदोलन में शामिल हुए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक रूप से जिम्मेदार बताते हुए उनके इस्तीफे की मांग के साथ आमरण अनशन शुरू कर दिया। उनके समर्थन में देश के कई राज्यों में भी प्रदर्शन तेज हो गए और विपक्षी दलों ने भी आंदोलन का समर्थन किया।अनशन लगातार लंबा खिंचने और स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद न्यायालय के निर्देश पर सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का दौर चला, जिसके बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने की घोषणा की।
इस्तीफे की मांग छोड़ने पर उठे सवाल
अनशन समाप्त होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि वांगचुक ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को अपनी अंतिम शर्तों में क्यों शामिल नहीं किया। इसको लेकर छात्रों और आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने निराशा भी जताई। इस पर सफाई देते हुए वांगचुक ने कहा कि सरकार इस्तीफे को लेकर कोई समयबद्ध आश्वासन देने की स्थिति में नहीं थी। ऐसे में उनके सामने दो विकल्प थे—या तो अनिश्चितकाल तक अनशन जारी रखें या आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए अपनी जान बचाएं।वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि यदि शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो इससे आंदोलन या छात्रों का नुकसान नहीं होगा, बल्कि सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार समय रहते फैसला लेती तो उसे राजनीतिक नुकसान से बचाया जा सकता था।
‘बच्चों का भविष्य सबसे बड़ी प्राथमिकता‘
वांगचुक ने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी चिंता आंदोलन में शामिल छात्रों का भविष्य था। उन्होंने कहा कि लद्दाख में उन्होंने देखा है कि एक एफआईआर वर्षों तक युवाओं के जीवन को प्रभावित करती है। इसलिए उन्होंने सबसे पहले यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि किसी भी छात्र पर गंभीर मुकदमा दर्ज न हो। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों को मुआवजा और संसद में पूरे प्रकरण पर चर्चा उनके लिए सबसे अहम उपलब्धियां हैं।सोनम वांगचुक ने देशभर के छात्रों, युवाओं और समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य का सवाल है। उन्होंने कहा कि अनशन समाप्त हुआ है, लेकिन जवाबदेही तय होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग बरकरार
हालांकि, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग अभी खत्म नहीं हुई है। आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोज जनता पार्टी (सीजेपी) ने स्पष्ट किया है कि जब तक शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। पार्टी का कहना है कि नीट पेपर लीक मामले में नैतिक जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है और इसी मांग को लेकर आगे भी आंदोलन चलता रहेगा।

