लखनऊ। स्वतंत्रता दिवस से पहले युवाओं को अपनी रचनात्मक प्रतिभा दिखाने का मंच देने के लिए ‘रंग दे बसंती’ अभियान शुरू किया गया है। बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के पास आयोजित ग्रैफिटी वॉल कार्यक्रम में युवाओं और कलाकारों ने पेंटिंग के जरिए बदलते उत्तर प्रदेश की तस्वीर पेश की। कलाकारों ने अपने चित्रों में वर्ष 2017 से पहले और उसके बाद प्रदेश में हुए बदलावों को दर्शाया कार्यक्रम में कलाकारों ने कानून-व्यवस्था, सड़कों, मेट्रो और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विषयों को पेंटिंग का हिस्सा बनाया। युवा चित्रकार मनीष सरोज ने अपनी पेंटिंग के जरिए प्रदेश में पहले के कथित माफिया प्रभाव और मौजूदा बदलाव को दर्शाने का प्रयास किया।लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र रंजीत ने कहा कि अभियान के जरिए युवा रंगों और कला के माध्यम से प्रदेश में हुए बदलाव का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेट्रो के विस्तार, सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव को भी पेंटिंग के माध्यम से दिखाया गया है।
विरोध हो, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से
अभियान में शामिल छात्र अमन शुक्ला ने कहा कि युवाओं को अपनी समस्याओं और मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा या उपद्रव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कला, संगीत और संवाद के जरिए भी अपनी बात प्रभावी तरीके से रखी जा सकती है।

‘बंदूक की जगह ब्रश, डर की जगह डायलॉग’
‘रंग दे बसंती’ अभियान की मूल भावना ‘बंदूक की जगह ब्रश, डर की जगह डायलॉग’ रखी गई है। 11 से 14 अगस्त तक चलने वाले अभियान में कविता, कला, संगीत, संवाद और डिजिटल अभिव्यक्ति के जरिए युवाओं को अपनी बात रखने का अवसर दिया जा रहा है। आयोजकों का उद्देश्य युवाओं को सकारात्मक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए प्रेरित करना है।

13 को मुजफ्फरनगर में संवाद कार्यक्रम
अभियान के तहत 13 अगस्त को मुजफ्फरनगर में कॉमिक वितरण और संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। स्कूलों में युवाओं के साथ संवाद के अलावा सांप्रदायिक सद्भाव पर आधारित कॉमिक भी वितरित की जाएगी। 14 अगस्त को अभियान का गीत ‘डर से आजादी’ लॉन्च किया जाएगा। इसके साथ रैप, संगीत और डिजिटल कला से जुड़े कार्यक्रम भी होंगे।

