लखनऊ। मोदी रबर लिमिटेड को सरकारी अनुदान अधिनियम के तहत दी गई 117 एकड़ जमीन में से करीब 59 एकड़ जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने जमीन हस्तांतरण मामले की नए सिरे से जांच कराने का आदेश दिया है। राजस्व परिषद के अधिकारियों की समिति को छह सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करनी होगी।कोर्ट ने पहले दिए गए आदेशों का पालन करने में हुई देरी पर राज्य सरकार पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह राशि जनहित याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ता को दिए जाने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।यह मामला लोकेश कुमार खुराना की ओर से दाखिल जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकारी अनुदान अधिनियम के तहत मोदी रबर लिमिटेड को दी गई 117 एकड़ जमीन में से करीब 59 एकड़ जमीन का राज्य सरकार की मंजूरी के बिना हस्तांतरण किया गया।हालांकि, इस मामले में कंपनी का अपना पक्ष भी है। हाईकोर्ट ने फिलहाल आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं दिया है, बल्कि पूरे मामले की दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं।
जिला स्तर की जांच में आरोप सही पाए गए थे
सुनवाई के दौरान राजस्व विभाग की प्रमुख सचिव अपर्णा 2 सितंबर को कोर्ट के सामने पेश हुईं। उन्होंने बताया कि जमीन हस्तांतरण को लेकर जिला स्तर पर शुरुआती जांच कराई गई थी। इस जांच में लगाए गए आरोप सही पाए गए थे।उन्होंने बताया कि मामले में राज्य स्तर पर निर्णय लिया जाना था। इसके लिए 24 फरवरी 2024 को बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के अधिकारियों को जांच सौंपी गई थी।
जांच समिति ने 3 जून 2025 को अपनी रिपोर्ट दी, लेकिन इसमें कोई स्पष्ट निष्कर्ष नहीं निकला। इसके बाद 3 दिसंबर 2025 को समिति के सदस्यों को दोबारा रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे।
नई समिति में चार अधिकारी शामिल
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान जांच में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि 8 अक्टूबर 2025 के आदेश के बावजूद पूरक जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया गया। वहीं, जांच समिति को निर्देश दिए जाने के बावजूद रिपोर्ट भी समय पर पेश नहीं की गई।अदालत ने मामले को लंबित रखने के लिए दिए गए कारणों को संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद कोर्ट ने अब नए सिरे से जांच के निर्देश दिए हैं।जमीन मामले की नई जांच के लिए राजस्व परिषद के विशेष अधिशासी अधिकारी राज कुमार द्विवेदी, मेरठ के अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), मेरठ के मुख्य कोषागार अधिकारी और सरधना के उप जिलाधिकारी को शामिल किया गया है।समिति को छह सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इसके बाद राज्य सरकार को रिपोर्ट मिलने के तीन सप्ताह के भीतर उस पर निर्णय लेना होगा।
सरकार पर लगाया 25 हजार रुपए का जुर्माना
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने मामले में राज्य सरकार की ओर से आदेशों के पालन में हुई देरी पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने यह रकम जनहित याचिकाकर्ता को देने का निर्देश दिया है।अब इस मामले में अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद मोदी रबर को दी गई जमीन और उसके कथित हस्तांतरण की जांच एक बार फिर नए सिरे से होगी।
